नई दिल्ली। वैवाहिक विवाद के बाद यदि पति-पत्नी अलग होते हैं तो उन्हें अपने सभी छोटे बड़े खर्चों का विवरण कोर्ट को हलफनामे के रूप में देना होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान यह बात कही कि अलग होने पर पति-पत्नी दोनों संपत्तियों और आय-व्यय का विस्तृत हलफनामा देंगे। जिससे उनकी वास्तविक आय का पता चलेगा। इसके आधार पर उन्हें गुजारा भत्ता देने और संपत्तियों को बांटने में आसानी होगी।
न्यायमूर्ति जे आर मिढा ने कहा कि न्यायालय का यह कर्तव्य है कि वह पति-पत्नी की वास्तविक आय का पता लगाए। इसके बाद कोई आदेश पारित करे। न्यायमूर्ति ने कहा कि उन्हें आशा है कि सत्य पर आधारित न्याय समाज में शांति स्थापित करेगा। इससे दोनों पक्षों को समान अधिकार प्राप्त होंगे।
उन्होंने विकसित देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि यूके, यूएसए, कनाडा, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका में वैवाहिक मुकदमे के दौरान दायर की जाने वाली संपत्ति और आय-व्यय के हलफनामों के प्रारूपों की जांच करने के बाद यह निर्णय लिया है।
न्यायाधीश ने इस मामले को लेकर विकसित देशों के संबंधित कानूनों पर व्यापक शोध करने वाले अधिवक्ता सुनील मित्तल, एमिकस क्यूरी अनू नरूला और विधि शोधकर्ता अक्षय चौधरी की सराहना की।
हाईकोर्ट ने 2015 में निर्देश दिया था और वैवाहिक विवाद में संपत्ति, आय तथा व्यय का विवरण देने के लिए पति-पति द्वारा दिए जाने वाले हलफनामे का प्रारूप भी तय किया था। हालांकि हाईकोर्ट ने मई तथा दिसंबर 2017 में अपने निर्देश तथा हलफनामे के प्रारूप में संशोधन किया था।
हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार के अपने निर्णय में निर्देश तथा हलफनामे के प्रारूप में संशोधन करते हुए इसे अधिक विस्तृत बना दिया है। अब इसमें पक्षकारों के वेतन, डीए, भत्ते आदि तथा आयकर का विवरण ीाी देना होगा।