नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बीच निजी स्कूलों ने अभिभावकों से वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क जमा कराने की मांग शुरू कर दी हैै। इसके लिए कई स्कूलों ने अभिभावकों को संदेश भी भेजने शुरू कर दिए हैं। मोटी फीस के साथ यह शुल्क जमा कराना अभिभावकों के लिए मुसीबत बन गया है। स्कूल मौजूदा सत्र की फीस के साथ-साथ बीते सत्र के वार्षिक शुल्क व विकास शुल्क को जमा कराने के लिए कह रहे हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों का विकास व वार्षिक शुल्क वसूलने की अनुमति दी है। जिसके बाद अभिभावकों के पास संदेश आने शुरू हो गए हैं। इस फीस के साथ एक्टिविटी, स्पोर्ट्स व कंप्यूटर क्लास के लिए भी फीस मांगी जा रही है। यह सब अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब है क्योंकि महामारी के कारण काफी अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
कोर्ट ने स्कूलों को अनुमति दी है कि वह शैक्षिक सत्र 2021-22 के लिए ट्यूशन फीस, अन्य शुल्क वसूल सकते हैं। इस फैसले को दिल्ली सरकार ने चुनौती दी थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम कहती हैं कि स्कूलों ने अभिभावकों से शुल्क वसूलने के लिए संदेश भेजने शुरू कर दिए हैं। स्पोर्ट्स, कंप्यूटर कक्षा के लिए भी फीस मांगी जा रही है, जबकि स्कूल बंद हैं। उन्होंने बताया कि वेंकटेश्वर, आईटीएल, पीपी इंटरनेशनल, डीएवी, हंसराज मॉडल स्कूल, वेद व्यास डीएवी पब्लिक स्कूल समेत कई अन्य स्कूलों ने अभिभावकों को शुल्क के साथ फीस देने के लिए संदेश भेजे हैं।
वहीं अपना प्राइवेट काम करने वाले आशुतोष कुमार कहते हैं कि कोरोना के कारण उनका काम काज पूरी तरह से ठप था। अभी खुला ही है। एक दम से आर्थिक तंगी ठीक नहीं होगी, पहले भी कमाई न के बराबर हुई है। अब समझ नहीं आ रहा कि बच्चों की यह फीस कैसे चुकाई जाएगी।