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पराली गलाने संबंधी योजना की हो सीबीआई जांच: खेड़ा

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नई दिल्ली। पराली को डिकम्पोज करने के लिए पूसा डिकम्पोजर के प्रचार के लिए केजरीवाल सरकार ने करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए, क्योंकि कुछ हजार की परियोजना को बढ़ावा देने पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। प्रदेश कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने ये बातें कहीं।
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उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार, पिछले 6 वर्षों से प्रदूषण का मुख्य कारक पराली को बताकर प्रदूषण पर नियंत्रण पाने की अपनी जिम्मेदारी से लगातार भाग रही है। पराली को गलाने के प्रयोग किए जाने वाले घोल पर लगभग 75,780 रुपये खर्च हुए। इसकी तैयारियों में ट्रैक्टर व टेंट पर 22.84 लाख रुपये खर्च किए। कुछ हजार के प्रोजेक्ट के प्रचार पर इतना खर्च देखकर सरकार की नीयत में खोट नजर आ रहा है।
खेड़ा ने कहा कि केन्द्र और दिल्ली सरकार के जनहित विरोधी निर्णयों की वजह से देश और दिल्ली का हर वर्ग परेशान है। तुलना की जाए तो अधिकतर समानता ही दिखेंगी, क्योंकि दोनों ने झूठ का दुष्प्रचार करके सत्ता हासिल की है। दिल्ली कांग्रेस इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करती है।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली में कुल 5800 हेक्टेयर में धान की खेती होती है, जिसमें 800 हेक्टेयर पर गैर-बासमती धान की खेती है। इसकी पराली को खेत में ही जला दिया जाता है। केजरीवाल सरकार ने पराली को जलाने की जगह गलाने वाले एक क्रांतिकारी घोल को बनाने की घोषणा की जिसके जरिये पराली से होने वाले प्रदूषण को पूर्णत: खत्म करने की बात कही।
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