उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलो का हवाला देते हुए कहा कि यदि ऐसे मामलों में आरोपी से हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है तो उसे जमानत प्रदान की जा सकती है। ऐसे में उनका मानना है कि आरोपी जमानत का हकदार है। अदालत ने कालरा की जमानत एक लाख रुपये के व्यक्तिगत मुचलके व दो अन्य जमानती पेश करने पर मंजूर की है। अदालत ने उसे गवाहों से संपर्क न करने, जिन्हें कंसंट्रेटर बेचे हैं उन लोगों से संपर्क न करनेका निर्देश दिया है। अदालत ने उसे जांच में सहयोग करने को भी कहा है।
इससे पूर्व सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए तर्क रखा था कि आरोपी ने लोगों से धोखाधड़ी की है और उन्हें खराब क्वालिटी के कंसंट्रेटर बेचे हैं। आरोपी ने इस जर्मनी तकनीक का बताया था जबकि वे जर्मनी के नहीं निकले। इसके अलावा कालरा ने दान में कंसंट्रेटर नहीं दिए, बल्कि पैसे भी वसूले हैं और वह भी दो सौ प्रतिशत ज्यादा। इसके अलावा हाईकोर्ट तक ने उसे राहत देने से इंकार कर दिया था।
उन्होंने श्रीराम लैब की रिपोर्ट भी हवाला दिया कि कंसंट्रेटर तय मानक के नहीं है। यह व्हाइट क्राईम है। ऐसे में जमानत देन पर वह साक्ष्य नष्ट कर सकता है। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि श्रीराम लैब को 2016 तक ही मान्यता प्रदान थी। हम रिपोर्ट को चुनौती दे रहे है यी भ्रम पैदा करने वाली है। ऐसे में जमानत प्रदान की जाए।