उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को अगले पांच वर्षों में निजी स्कूलों में खाली ईडब्ल्यूएस सीटों के बैकलॉग को दूर करने के प्रयास करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि सरकार को उन मामलों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों की सहायता के लिए कदम उठाना होगा जहां स्कूलों ने प्रवेश की आवश्यकताओं का अनुपालन नहीं किया है।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में प्री-स्कूल, नर्सरी, प्री-प्राइमरी, केजी और कक्षा 1 की 25 प्रतिशत सीटें प्रवेश स्तर पर घोषित स्वीकृत संख्या के आधार पर भरी जाएं। अदालत ने कहा सामान्य श्रेणी में प्रवेश लेने वाले छात्रों की वास्तविक संख्या पर ध्यान दिए बिना ऐसा किया जाए।
पीठ ने कहा ऐसे उदाहरणों में जहां स्कूलों ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों के प्रवेश की सख्त आवश्यकताओं का पालन नहीं किया है। सरकार को बच्चों की सहायता के लिए कदम उठाना होगा और कल्याणकारी राज्य के रूप में अपने कर्तव्य का पालन करना होगा। सरकारी भूमि का कोई भी लाभार्थी आवंटन के तहत अपने दायित्व को नजरअंदाज या टाल नहीं सकता। अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से सीटे भरी जाती है, यानी प्रत्येक वर्ष रिक्तियों का 20 प्रतिशत अनिवार्य वार्षिक 25 प्रतिशत।
दिल्ली सरकार के स्थायी वकील संतोष कुमार त्रिपाठी और अधिवक्ता अरुण तंवर ने पीठ को बताया कि 132 निजी स्कूलों को प्रथम दृष्टया ईडब्ल्यूएस श्रेणी में छात्रों के प्रवेश पर सरकार के निर्देश का उल्लंघन करते पाया गया है और उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में सीटों को प्रवेश स्तर पर पूरी तरह से भरा जाना है लेकिन कुछ स्कूल पिछले एक दशक से ईडब्ल्यूएस छात्रों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले निजी स्कूलों को 25 प्रतिशत छात्रों को ईडब्ल्यूएस श्रेणी में प्रवेश देना है जिसके लिए फीस का भुगतान एक सरकारी स्कूल के छात्र के लिए किए गए खर्च के आधार पर किया जाता है। सरकारी जमीन पर निजी स्कूलों को प्रवेश स्तर पर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 25 प्रतिशत छात्रों को प्रवेश देना पड़ता है।
हालांकि दिल्ली सरकार की ओर से इस कैटेगरी के सिर्फ 5 फीसदी छात्रों का ही रीइंबर्समेंट किया जाना है। अदालत ने आदेश में कहा है कि शेष 20 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस बच्चों के लिए शिक्षा खर्च खुद निजी स्कूलों की जिम्मेदारी है क्योंकि सरकारी जमीन के आवंटन की शर्त है। पीठ ने दिल्ली सरकार को अगली तारीख से पहले अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 4 अगस्त तय की है।
पीठ एनजीओ जस्टिस फॉर ऑल की एक अपील पर सुनवाई कर रही है। याची खगेश बी झा और शिखा शर्मा बग्गा ने सिंगल जज के उस निर्णय को चुनौती दी है जिसमें ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत प्रवेश की तिथि 31 दिसंबर तय की है।
याची ने कहा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार प्रवेश की कोई अंतिम तिथि नहीं होनी चाहिए और इस कट-ऑफ तिथि के कारण ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों को निजी स्कूल ड्रॉ में चुने जाने के बावजूद प्रतीक्षा में रखते हैं।