नई दिल्ली। राजधानी के 33 निजी अस्पतालों में अब कोरोना मरीजों के लिए आईसीयू में 30 से 40 प्रतिशत ही बेड आरक्षित रखे जाऐंगे। यह निर्णय राजधानी में कोरोना मरीजों की घटती संख्या के मद्देनजर लिया गया है। दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि 5 जनवरी की मीटिंग में यह निर्णय लिया गया है। अदालत ने निजी अस्पतालों से उनके यहां रिक्त बेड की संख्या की जानकारी मांगी है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला के समक्ष सरकार ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। अदालत ने मामले की सुनवाई 11 जनवरी तय करते हुए निजी अस्पतालों को अपने यहां खाली आईसीयू बेड के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट निजी अस्पतालों में सरकार द्वारा 80 प्रतिशत आईसीयू बेड आरक्षित करने के निर्णय को चुनौती याचिका पर सुनवाई कर रही है।
दिल्ली सरकार ने पेश रिपोर्ट में कहा कि वसंत कुंज के फोर्टिस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, रोहिणी के सरोज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, मॉडल टाउन के महा दुर्गा चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल एवं पूसा रोड के सर गंगाराम सिटी अस्पताल पहले की ही तरह कोरोना मरीजों के लिए समर्पित रहेंगे। इन अस्पतालों में कुल बेड की क्षमता का 30 प्रतिशत बेड आरक्षित रहेंगे।
इनमें आईसीयू बेड में से 40 प्रतिशत या जितने मरीज भर्ती हैं उसके दोगुने आईसीयू बेड खाली रखने होंगे। साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहले की तरह कोरोना मरीजों के लिए समर्पित रहेगा।