राजधानी में हरित क्षेत्रों के बेहतर उपयोग और राजस्व बढ़ाने के लिए एमसीडी ने नई योजना पर कार्य करने का निर्णय लिया है। एमसीडी अपने एक एकड़ या उससे बड़े पार्कों में आउटसोर्सिंग से नर्सरी विकसित कराएगी। इनसे उसको निश्चित शुल्क के रूप में आय प्राप्त होगी। चयनित पार्कों में फ्लोरिस्ट और उद्यान से जुड़े व्यवसायों के लिए क्योस्क बनाने की भी योजना है, जिससे पार्कों का रखरखाव बेहतर हो सकेगा।
एमसीडी के पास वर्तमान में 15,230 पार्क हैं। इनमें से अधिकतर का क्षेत्रफल एक एकड़ या उससे अधिक है। कई बड़े पार्कों में संसाधनों की कमी के कारण हरियाली बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। पार्कों में नर्सरी विकसित करने के लिए निजी एजेंसियों या उद्यान विशेषज्ञों को आउटसोर्स किया जाएगा। ये एजेंसियां पौधों की नर्सरी तैयार करेंगी। पौधों की बिक्री पर एमसीडी को तय शुल्क प्राप्त होगा।
एमसीडी के अनुसार, कुछ चयनित पार्कों में फ्लोरिस्ट और उद्यान से जुड़े छोटे व्यवसायों के लिए क्योस्क भी विकसित किए जाएंगे। इन क्योस्क में फूल, पौधे, बागवानी से जुड़ी सामग्री और सजावटी पौधों की बिक्री की जा सकेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और पार्कों का उपयोग भी अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगा।
हरित क्षेत्रों का संरक्षण जरूरी
एमसीडी का मानना है कि दिल्ली जैसे महानगर में हरित क्षेत्रों का संरक्षण बेहद जरूरी है। बढ़ते शहरीकरण के बीच पार्क ही ऐसे स्थान हैं, जहां लोगों को स्वच्छ वातावरण और हरियाली मिलती है। यदि इन पार्कों का व्यवस्थित उपयोग किया जाए तो न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सकती है, बल्कि एमसीडी के लिए अतिरिक्त राजस्व का स्रोत भी तैयार किया जा सकता है। इस संबंध में एमसीडी सदन में एक प्रस्ताव को स्वीकृति दी जा चुकी है।