उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में ट्रेड और फैक्टरी लाइसेंस में शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद बृहस्पतिवार को सदन से भी मंजूरी मिल गई है। वहीं, तृतीय निगम मूल्यांकन समिति की सिफारिशों को भी मंजूर कर लिया गया है। यानी अब व्यावसायिक संपत्तियों के संपत्ति कर में वृद्धि हो गई है। वहीं, ट्रेड व फैक्टरी लाइसेंस भी महंगा हो गया है।
फैक्टरी लाइसेंस फीस में वृद्धि होने के बाद अब आवेदक को 550 रुपये के बजाए एक हजार का शुल्क जमा करना होगा। वहीं, पंजीकरण के लिए दो हजार के बजाए फैक्टरी में लगे उपकरणों के अनुसार शुल्क लगेगा। इसमें एक से पांच हॉर्स पावर के लिए दो हजार, छह से 15 हॉर्स पावर के लिए चार हजार, 16 से 50 हॉर्स पावर के 25 हजार और 50 हॉर्स पावर से अधिक के लिए 50 हजार का शुल्क जमा करना होगा।
साथ ही इकाई पर वार्षिक तौर पर लगने वाला स्थायी शुल्क 80 रुपये के बजाए एक हजार देना होगा। इसके अलावा प्रति हॉर्स पावर पर लगने वाला चार रुपये शुल्क के बजाय अब 50 रुपये शुल्क भी अदा करना होगा। वहीं तृतीय मूल्यांकन समिति की सिफारिशों की बात करें तो इसके तहत सिनेमा हॉल, मॉल, बरात घर समेत अन्य शैक्षणिक संस्थानों को दो से चार गुना तक अधिक संपत्ति कर देना होगा।
इसमें ए और बी श्रेणी में 10 वर्ग मीटर तक के स्थान के लिए ट्रेड लाइसेंस के लिए 500 रुपये वार्षिक शुल्क के बजाय अब 3450 शुल्क देना होगा। इसके अलावा 10 से 20 वर्ग मीटर तक के लिए 8625 और 20 वर्ष से अधिक मीटर के लिए 144 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से शुल्क को अदा करना होगा। यह शुल्क अधिकतम 57 हजार तक रहेगा।
वहीं, सी और डी श्रेणी में यह 10 वर्ग मीटर तक के लिए 500 रुपये के बजाए 2300, 10 से 20 वर्ग मीटर के लिए 5750 और अधिकतम 46 हजार तक रहेगा। इनके अलावा ई, एफ, जी और एच वर्ग के लिए 10 वर्ग मीटर तक के लिए 500 रुपये के बजाए 1150 रुपए प्रति वर्ष और 10 से 20 वर्ग मीटर तक के लिए 2875 रुपये प्रति वर्ष और अधिकतम 34,500 का वार्षिक शुल्क लगेगा।