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नजीर: झिमरपुरा गांव में नहीं दस्तक दे सका कोरोना, संक्रमण की चपेट में न आने के बावजूद वैक्सीन लगवाने में लगे ग्रामीण

Wed, 09 Jun 2021 01:20 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तर पश्चिम दिल्ली स्थित झिमरपुरा गांव की करीब आठ सौ आबादी है। मूलभूत सुविधाओं से मोहताज इस गांव का एक भी व्यक्ति सरकारी नौकरी पर नहीं है। इसी तरह गांव का कोई भी व्यक्ति निजी नौकरी भी नहीं करता है। गांव के समस्त निवासी कृषि कार्य करते हैं और वे खासकर सब्जी की खेती करते हैं। 
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कोरोना टीकाकरण - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली के करीब-करीब सभी गांवों के ग्रामीण संक्रमित हुए हैं और इनमें से अधिकतर गांवों में संक्रमण के कारण ग्रामीणों की मौत भी हुई, लेकिन दिल्ली का झिमरपुरा एक ऐसा गांव है जिनमें कोरोना दस्तक नहीं दे पाया। इस गांव में कोरोना की पहली लहर की तरह दूसरी लहर में भी ग्रामीण संक्रमण से बचे रहे। दरअसल कोरोना की दूसरी लहर की दस्तक के साथ ही इस गांव के लोगों ने स्वयं को गांव में कैद कर लिया और कोरोना उनके पास नहीं फटक नहीं पाया।

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उत्तर पश्चिम दिल्ली स्थित झिमरपुरा गांव की करीब आठ सौ आबादी है। मूलभूत सुविधाओं से मोहताज इस गांव का एक भी व्यक्ति सरकारी नौकरी पर नहीं है। इसी तरह गांव का कोई भी व्यक्ति निजी नौकरी भी नहीं करता है। गांव के समस्त निवासी कृषि कार्य करते हैं और वे खासकर सब्जी की खेती करते हैं। वे सब्जी बचने का कार्य भी स्वयं करते हैं। वे रिक्शा के माध्यम से दूसरे गांवों में सब्जी बेचने जाते हैं।

गांव निवासी रणजीत के अनुसार कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ग्रामीणों ने सब्जी बेचने का कार्य बंद कर दिया, वहीं उनका गांव अलग-थलग होने के कारण अन्य गांवों के लोग कभी भी आते नहीं हैं। इस कारण उनके गांव के लोगों का दूसरे इलाके के लोगों से संपर्क टूट गया और उनके गांव में कोरोना दस्तक नहीं दे सका। कोरोना के मामले कम होने के बाद अब ग्रामीणों ने दूसरे गांवों में सब्जी बेचने के लिए जाना शुरू कर दिया है। इस दौरान वे कोरोना से बचने के सभी नियमों का पालन करते हैं।
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उधर ग्रामीण जगदीश ने बताया कि दूसरी लहर से पहले गांव के कुछ लोगों ने आसपास के गांवों में जाकर वैक्सीन लगवा ली थी। अब कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होने पर ग्रामीण वैक्सीन लगवाने में लग गए हैं। गांव के 45 साल से अधिक आयु के अधिकतर ग्रामीणों ने वैक्सीन लगवा ली है और ग्रामीण 45 साल से कम आयु वालों को वैक्सीन लगाए जाने की शुरूआत का इंतजार कर रहे हैं।

झिमरपुरा गांव में मूलभूत सुविधाओं के नाम पर एक चौपाल बनी हुई है। इसके अलावा एक प्राथमिक विद्यालय है, स्वास्थ्य सेवा के नाम कोई सुविधा नहीं है और आज तक गांव तक बस भी नहीं चली है। ग्रामीणों को बस सेवा के लिए करीब ढाई किलोमीटर दूर जोंती जाना पड़ता है। वहीं गांव स्थित श्मशान घाट में टीन शैड भी नहीं लगा रखा है। गांव की अधिकतर गली व नाली टूटी पड़ी हुई है। ग्रामीणों को गर्मी के मौसम में पेयजल संकट का भी सामना करना पड़ता है।

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