नई दिल्ली। आर्थिक तंगी से जूझ रही उत्तरी दिल्ली नगर निगम को इस वित्तीय वर्ष में व्यवसायिक संपत्तियों से संपत्ति कर के रूप में 210.16 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। यही नहीं रिहायशी संपत्तियों से भी निगम ने 103.61 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है। साथ ही हेल्थ ट्रेड लाइसेंस से 13,81,915 और जनरल ट्रेड लाइसेंस से 100. 09 लाख रुपये की प्राप्ति हुई है।
इस संबंध में उत्तरी निगम के महापौर जय प्रकाश ने बताया कि निगम संपत्ति कर से राजस्व की बढ़ोतरी करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। यही वजह है कि हमने इस बार लॉकडाउन को देखते हुए संपत्ति कर को जमा कराने की तिथि आगे बढ़ाई थी। अब लोग संपत्ति कर जमा करा रहे हैं इसे देखते हुए जल्द ही 15 से 20 दिन की समय सीमा बढ़ाई जा सकती है।
महापौर ने कहा कि निगम को अधिक से अधिक संपत्ति कर मिले इसके लिए प्रत्येक वार्ड में एक निरीक्षक को कम से कम 20 व्यवसायिक संपत्तियों का कर जमा कराने का लक्ष्य दिया है। जो निरीक्षक बेहतर कार्य करेंगे उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कई बार देखने में आता है कि संपत्ति कर दो लाख रुपये बनता है, बाद में वह 50 हजार में सेटल हो जाता है। अब तय किया गया है कि जिन लोगों का संपत्ति कर दो लाख से अधिक होगा उसकी एक कॉपी अतिरिक्त आयुक्त के पास भी जमा होगी। मुख्यालय में जानकारी रहने से पारदर्शिता के साथ भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।