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विकास यादव को एम्स में विशेष सुविधाएं देने वाले दो पुलिस कर्मियों की बर्खास्तगी उचितः हाईकोर्ट

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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नितीश कटारा हत्याकांड के दोषी विकास यादव को एम्स में इलाज के दौरान विशेष सुविधाएं प्रदान करने के मामले में बर्खास्त दो पुलिसकर्मियों की अपील हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।

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न्यायमूर्ति मूर्ति विपिन सांघी और रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि सभी दस्तावेज और साक्ष्यों से साबित होता है कि दोषी विकास यादव को इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया था, लेकिन याचिकाकर्ता पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से विकास वर्ष 2011 में दीवाली की रात एम्स के रूम से बगैर पैरोल अपने परिवार से मिलने चला गया। पुलिसकर्मियों ने कर्तव्यों का पालन नहीं किया। ऐसे में इनकी बर्खास्तगी उचित है।

इस मामले में कांस्टेबल रमेश कुमार और हेड कांस्टेबल ईश्वर सिंह के खिलाफ जांच की गई और अनुशासनात्मक कमेटी ने दोनों को उनके व्यवहार, कार्य व अन्य तथ्यों को देखकर बर्खास्तगी का आदेश पारित कर दिया। पुलिसकर्मियों ने कमेटी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पीठ ने अपने 12 पृष्ठ के फैसले में कहा कि इन दोनों के आचरण को देखते हुए कमेटी के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
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जघन्य तरीके से की थी हत्या
विकास यादव पर आरोप था कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर 16 फरवरी 2002 को एक विवाह समारोह के दौरान नितीश कटारा का अपहरण कर लिया और उसके बाद उसकी जघन्य तरीके से हत्या कर शव जला दिया। विकास यादव अपनी बहन से नितीश कटारा के संबंधों को लेकर नाराज था। इस मामले में विकास को 25 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने भी विकास की सजा के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया था। विकास के साथी सुखदेव पहलवान को 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।

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