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फांसी टलवाने में मुकेश हुआ नाकाम, घटना वाले दिन दिल्ली में न होने का किया था दावा

Wed, 18 Mar 2020 05:24 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
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अदालत ने निर्भया के चार में से एक दोषी मुकेश की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने सामूहिक दुष्कर्म यानी 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में नहीं होने का दावा किया था। इसके अलावा मुकेश ने तिहाड़ जेल प्रशासन पर उसे प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया था। अदालत ने दोषी व अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी। निर्भया के चारों दोषियों मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को 20 मार्च की सुबह साढ़े 5 बजे फांसी पर लटकाया जाना है।

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पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने मुकेश व अभियोजन की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में कहा गया था कि पुलिस ने उसे 17 दिसंबर को राजस्थान से गिरफ्तार किया था, जबकि 16 दिसंबर को घटना हुई थी। यह याचिका मुकेश सिंह ने वकील एमएल शर्मा के माध्यम से दायर कर दावा किया था कि घटना के दिन मुकेश दिल्ली में ही नहीं था तो उसे दी गई फांसी की सजा को रद्द किया जाए।

निर्भया के चारों दोषियों विनय, अक्षय, पवन और मुकेश के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेन्द्र राणा ने ही 5 मार्च को चौथा डेथ वारंट जारी किया था। इससे पहले दोषियों के कानूनी विकल्पों के तहत याचिकाओं के लंबित होने के कारण पटियाला हाउस कोर्ट तीन बार दोषियों के डेथ वारंट को रद्द कर दिया था। अब दोषी चौथे डेथ वारंट को भी रद्द करवाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
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उल्लेखनीय है कि सोमवार को ही निर्भया के तीन दोषियों विनय, पवन और अक्षय की ओर से फांसी की सजा पर रोक लगाने की अपील करते हुए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में गुहार लगाई है। इस याचिका में दोषियों के वकील एपी सिंह ने तीनों दोषियों के परिवारों द्वारा राष्ट्रपति को दी गई इच्छा मृत्यु की अनुमति की अर्जी समेत उनकी आर्थिक स्थिति को विस्तार से बताया है। याचिका में कहा गया था कि दोषियों के परिवारों में बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी हैं, जिनका भरण पोषण दोषियों पर ही है और अगर दोषियों को फांसी दी गई तो उनके परिवार भी उजड़ जाएंगे।

सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया गया, जिसमें मुकेश ने अपनी न्याय मित्र वृंदा ग्रोवर पर क्यूरेटिव याचिका दायर करने के संबंध में अधूरी जानकारी देने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही मामले की सीबीआई द्वारा जांच करवाने की मांग की गई थी। इस याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई भी तथ्य सुनवाई योग्य नहीं है।

इसके अलावा मुकेश ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से क्यूरेटिव याचिका दायर करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश की रिव्यू पिटिशन को 9 जुलाई 2018 को खारिज कर दिया था और उसकी दया याचिका को राष्ट्रपति द्वारा खारिज कर दिया गया था।

इस मामले के नाबालिग दोषी को घटना के बाद बाल सुधार गृह में तीन साल रखने के बाद 2015 में छोड़ दिया गया था, जबकि मामले में छठे आरोपी रामसिंह ने गिरफ्तार होने के कुछ दिन बाद ही तिहाड़ जेल में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी।

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