नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बाल श्रम से मुक्त करवाए गए बच्चों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की मांग वाली याचिका पर सोमवार को दिल्ली सरकार और पुलिस से जवाब मांगा है। एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन ने कोरोना महामारी से बच्चों के बचाव के लिए यह याचिका दायर की है। इन बच्चों की कोरोना जांच सरकारी अस्पतालों में ले जाकर कराने के बजाय जहां उन्हें रखा गया है, वहीं करवाने की मांग भी की गई है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी कर 28 जुलाई तक जवाब मांगा। एनजीओ की वकील प्रभसहाय कौर ने अदालत से अपील की कि सुनवाई की आगामी तारीख तक दंडाधिकारी के सामने बच्चों के बयान दर्ज करने के लिए उन्हें अदालत न लाया जाए।
दिल्ली सरकार के वकील ने पीठ को बताया कि सुनवाई की आगामी तारीख तक किसी भी बच्चे को बयान दर्ज करने के लिए अदालत नहीं ले जाया जाएगा। सरकारी वकील ने पीठ को बताया कि प्रशासन वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बयान दर्ज करने पर विचार कर रहा है और उन्होंने इसके लिए दंडाधिकारियों को बाल देखभाल संस्थाओं या घरों में भेजने का विकल्प भी सुझाया।
एनजीओ ने अपनी याचिका में कहा कि कुछ दिन पहले अधिकारियों के साथ मिलकर बाल श्रम से कई बच्चों को मुक्त करवाया था। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने पुलिस को दंडाधिकारी के सामने बच्चों का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया था।