उत्तरी दिल्ली नगर निगम में साप्ताहिक बाजारों के लिए नई नीति तैयार की जाएगी। इस कड़ी में वेंडरों को लाइसेंस देने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए सभी उपायुक्तों को अपने क्षेत्रों में साप्ताहिक बाजारों का सर्वे कर 10 दिनों के भीतर निगम मुख्यालय में रिपोर्ट जमा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
उत्तरी निगम की बुधवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में नेता सदन योगेश वर्मा ने साप्ताहिक बाजारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि निगम क्षेत्र में करीब 106 साप्ताहिक बाजार लगते हैं, हालांकि इनकी संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। नई नीति को इस तरह से तैयार किया जाएगा कि जिससे स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। क्योंकि, कई बार लोगों के घरों के आगे बाजार लग जाते हैं। इससे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
येला लाइन से निर्धारित की जाएगी सीमा
योगेश वर्मा ने बताया कि नई नीति के तहत साप्ताहिक बाजारों में येला लाइन रेखांकित की जाएगी। इसके दायरे में ही साप्ताहिक बाजारों को लगने की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य आपातकालीन वाहनों में शामिल दमकल, पुलिस व एंबुलेंस को अलग से रास्ता देने की व्यवस्था करना है। वहीं, साप्ताहिक बाजारों का अब कॉलोनियों में शुरुआती व अंत केंद्र भी निर्धारित किया जाएगा, जिससे जाम की समस्या न हो। हालांकि, वर्तमान में भी साप्ताहिक बाजारों का सीमांकन किया गया है। इसमें साप्ताहिक बाजार पहले आओ पहले पाओ के आधार पर लगाए जाते हैं।
निगम को होगी राजस्व की प्राप्ति
नई नीति के तहत साप्ताहिक बाजारों के वेंडरों को लाइसेंस देने पर भी विचार चल रहा है। इसमें तहबाजारी वेंडरों को भी शामिल किया जाएगा। लाइसेंस देने से निगम को भी वित्तीय मदद का रास्ता खुलेगा। वहीं, दूसरी ओर वेंडरों को भी मालिकाना हक मिल सकेगा।
पिछले चार वर्षों में निगम की बाजारों से कमाई
2017-18- 83.43 लाख
2018-19-86.68 लाख
2019-20- 68.61 लाख