प्रदेश भाजपा सीएम पद के उम्मीदवार डॉ. हर्षवर्धन ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर जलबोर्ड में घोटाला करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित निजी कंपनियों से साठगांठ करजल बोर्ड को करोड़ों रुपये का घाटा करवा रही है।
मुख्यमंत्री पानी के निजीकरण के नाम आर्थिक चोट दिल्ली वालों को पहुंचा रही हैं।
उन्होंने कहा है कि जलबोर्ड में हुए घोटाले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री को जल बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ताजा घोटाला करीब चार लाख पानी के मीटरों की खरीद का है। यह मीटर 5070 की दर से खरीदा गया, जबकि वास्तविक लागत महज 995 रुपये ही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि वाटर टैंक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को 61 करोड़ रुपये के नामांकन आधार पर निजी क्षेत्र को सौंपा गया है।
जबकि इसके लिए महज 15.85 करोड़ ही खर्च होना चाहिए था। यह घोटाला कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला जैसा गंभीर है।
मुद्दा एक नेता तीन
प्रदेश भाजपा में जितने नेता हैं उतने ही सुर हैं। एक ही मुद्दे पर भाजपा के नेता तीन-तीन बार प्रेसवार्ता करते दिखाई पड़ रहे हैं।
शुक्रवार को प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल ने जल बोर्ड में घोटाले का आरोप जहां मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर लगाया तो वहीं शनिवार को इसी मुद्दे पर भाजपा के सीएम पद के उम्मीदवार डॉ. हर्षवर्धन ने मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा किया।
इसी तरह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इसी मसले पर मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा किया है।
पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि तीनों नेता एक मंच से अगर मुख्यमंत्री का घेराव करते तो ज्यादा दमदार होता।