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आसान नहीं हैं डीयू में आरक्षण

Thu, 03 Oct 2013 02:03 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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डीयू में दिल्ली के छात्रों को 90 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव कहीं आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बिसात बनकर न रह जाए। क्योंकि पहले बीजेपी ने डीयू में 85 फीसदी आरक्षण की मांग की।
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अब कांग्रेस ने युवा वोटर्स को लुभाने के लिए इससे आगे जाकर 5 फीसदी अधिक 90 फीसदी आरक्षण देने की सिफारिश कर दी। वह भी तब जबकि दिल्ली सरकार के हाथ में केंद्रीय विश्वविद्यालय के इस एक्ट में बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है।

डीयू के वरिष्ठ शिक्षकों की मानें तो डीयू का अपना एक्ट है, जिसे संसद की मंजूरी मिली है। दिल्ली सरकार भले ही कॉलेजों को फंड देती है मगर उन कॉलेजों में भी डीयू का एक्ट लागू होता है।
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डीयू के एक्ट में बदलाव के लिए संसद की मंजूरी जरूरी है। इसलिए आरक्षण में कोई बदलाव तभी संभव है, जबकि संसद इसे मंजूरी दे और यह एक लंबी प्रक्रिया है।

माना जा रहा है कि चुनावी फायदा उठाने को यह शिगूफा छोड़ा गया है।

दिल्ली सरकार उन 12 कॉलेजों में 90 फीसदी दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षण का प्रस्ताव रखा है, जहां वह कॉलेज को फंड मुहैया कराती है।

अगर यह आरक्षण प्रक्रिया मौजूदा सत्र में लागू होता तो अनुमान के मुताबिक कुल 36 हजार छात्रों को फायदा मिलता है।

सरकार के मुताबिक 12 कॉलेजों में 15,756 छात्र पंजीकृत हैं। जबकि 16 कॉलेजों में 45,419 छात्रों का पंजीकृत हैं। अनुमान के अनुसार इनमें राजधानी के करीब 17 हजार छात्र हैं।

आरक्षण लागू होता तो यह संख्या 36 हजार के आस-पास होती।

डूसू उपाध्यक्ष ने किया विरोध
डीयू में दिल्ली सरकार के 12 कॉलेजों में आरक्षण के प्रस्ताव का बाहरी छात्रों के साथ डूसू उपाध्यक्ष उत्कर्ष चौधरी ने भी विरोध जताया।

उनके मुताबिक छात्रों को कही भी पढ़ने की आजादी होनी चाहिए। वह कहते हैं कि मै खुद फरीदाबाद से हूं, वर्तमान में डीयू के छात्रों ने मुझे प्रतिनिधि के तौर पर चुना है।
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