भाजपा के पीएम इन वेटिंग नरेंद्र मोदी की रैली से पहले प्रदेश प्रभारी नितिन गडकरी ने कूटनीति अपनाकर प्रदेश भाजपा के सभी गुटों को एक मंच पर तो ला दिया है, लेकिन यहां मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा पार्टी के लिए जोखिम भरा काम होगा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की तरफ से मोदी की रैली में मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा के बाण चलने के बाद आज मोदी उम्मीदवार का के नाम का ऐलान तो नहीं करेंगे, लेकिन इशारे-इशारे में बहुत कुछ समझने को मिल सकता है।
ऐसे में मुख्यमंत्री के दावेदार ही नहीं, पूरी दिल्ली की नजर होगी कि मोदी किस तरफ इशारा करते हैं।
दरअसल, प्रदेश भाजपा की गुटबाजी पर पार पाने की चुनौती स्वीकार करते हुए गडकरी ने यहां की जिम्मेदारी संभालने के बाद सभी नेताओं को अपने-अपने तरीके से समझाकर काम पर लगाया हुआ है।
इसके बाद ही मोदी की रैली के पोस्टरों व होर्डिंग पर प्रदेशाध्यक्ष विजय गोयल के साथ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार मल्होत्रा भी आ गए। डॉ. हर्षवर्धन को भी आगे लाने की बात बीच-बीच में आती रहती है।
गडकरी की कोशिश के चलते इस समय पर सभी धड़े पार्टी के प्रचार में जुटे दिखाई दे रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मोदी की रैली के मंच पर अभी तक नितिन गडकरी, प्रदेश सहप्रभारी नवजोत सिंह सिद्धू के अलावा विजय गोयल और विजय कुमार मल्होत्रा का होना तय है, लेकिन इनके अलावा भी एक या दो अन्य नेता मंच पर हो सकते हैं।
गुटबाजी पर फिलहाल काबू होने के चलते प्रदेश प्रभारी को यह अंदेशा है कि मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा के साथ ही शांत पड़ी गुटबाजी फिर से उभर सकती है।
ऐसे में मोदी अपने संबोधन में मुख्यमंत्री के नाम की सीधी घोषणा तो नहीं करेंगे, लेकिन पीएम इन वेटिंग मंच पर मौजूद दो नेताओं के अलावा सीएम इन वेटिंग के नामों पर इशारा जरूर करेंगे।
माना जा रहा है कि मोदी की रैली में प्रदेश के जिस नेता को ज्यादा तवज्जो मिलेगी, उसका नाम उतना मजबूत माना जाएगा।
इसके अलावा उनका भाषण दिल्ली और केंद्र सरकार की नाकामियों, भ्रष्टाचार गुजरात के मुकाबले दिल्ली के विकास पर केंद्रित रहेगा।
तय योजना के अनुसार उनके भाषण में अल्पसंख्यकों को भी रिझाने की कोशिश होगी। रेवाड़ी और भोपाल में मोदी की रैली में उमड़ी लाखों की भीड़ के बाद आज दिल्ली के जापानी पार्क में आयोजित रैली में भीड़ का पैमाना भी प्रदेश भाजपा व यहां के नेताओं के लिए काफी कुछ तय करेगा।