नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राजधानी में अपराधों पर अंकुश लगाने में असमर्थ दिल्ली पुलिस के प्रति नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि, गैंगरेप सहित अन्य जघन्य अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन व न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराज योग की खंडपीठ ने 16 दिसंबर को हुए गैंगरेप के बाद स्वत: संज्ञान लेने संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि, इस घटना के बाद अपराधों को रोकने के लिए कई दिशा निर्देश दिए गए थे। वर्तमान में असली मुद्दा इन दिशा निर्देशों पर अमल का है। अदालत ने पुलिस अधिकारियों से कार्यशैली व व्यवस्था में सुधार करने को कहा।
अदालत के समक्ष पेश दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता दयान कृष्णन ने शपथपत्र सहित जवाब दाखिल कर बताया कि कितने अधिकारियों के पद रिक्त हैं और कितने जांच में लगे हैं। खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को भी निर्देश दिया कि, 3 अक्तूबर को अगली सुनवाई पर स्पष्ट किया जाए कि राजधानी में कितनी फोरेंसिक प्रयोगशाला है और रिपोर्ट तैयार करने में कितना समय लगता है।
अदालत ने स्वास्थ्य विभाग को भी सभी सरकारी सहित निजी अस्पतालों को रेप पीड़िता व घायल मरीजों को तुरंत चिकित्सा प्रदान करने का निर्देश जारी करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी अस्पताल इलाज के लिए मना नहीं करेगा।