नई दिल्ली। अदालत ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मानहानि मामले में पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गुप्ता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है। साकेत स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नमृता अग्रवाल ने सात पृष्ठों के फैसले में कहा, ‘हर व्यक्ति की प्रतिष्ठा अहम होती है और विजेंद्र ने जिस प्रकार याची शीला दीक्षित के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया है, वह सरासर उनकी प्रतिष्ठा को नष्ट करने की श्रेणी में आता है।’ अदालत ने कहा कि विजेंद्र गुप्ता ने शीला दीक्षित के प्रति धोखेबाज और विलेन की भाषा का प्रयोग किया है। यह उनकी प्रतिष्ठा नष्ट करने के लिए काफी है। अदालत ने विजेंद्र को 22 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि उनकी नजर में विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि का मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। अदालत ने गुप्ता के उस तर्क को खारिज कर दिया कि यह मामला मात्र समाचार पत्र में छपे लेख पर आधारित है। कोर्ट ने कहा कि लाखों लोग समाचार पत्र पढ़ते हैं, ऐसे में उनकी टिप्पणी से याची की प्रतिष्ठा नष्ट हुई है। इसके अलावा उन्होंने स्वयं माना था कि बयान सोच समझकर दिया था। इसके बावजूद माफी नहीं मांगी।
मुख्यमंत्री ने 30 मई, 2012 को अदालत में पेश होकर अपने बयान दर्ज करवाए थे। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि हाल ही में विजेंद्र गुप्ता ने एक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में उन्हें विलेन और धोखेबाज बताया है। विजेंद्र को अपना पक्ष रखने की इजाजत है, मगर उनकी भाषा हमेशा ही आपत्तिजनक रही है। विजेंद्र हमेशा झूठ बोलते है और उनकी भाषा अभद्र और असंसदीय रही है जो मानहानि पूर्ण है। अत: गुप्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। शीला दीक्षित ने विजेंद्र गुप्ता द्वारा उन पर बिजली कंपनियों से मिलीभगत का आरोप लगाने पर हाईकोर्ट में भी मानहानि का मुकदमा दायर कर रखा है। मुख्यमंत्री ने विजेंद्र से बतौर मुआवजा एक रुपये दिलवाने की मांग की है। अदालत ने इस मामले में दोनों को आपसी रजामंदी से निपटारा करने की राय दी थी, मगर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया।