नई दिल्ली। शादियों, विभिन्न धार्मिक और शोभा यात्राओं आदि में उपयोग होने वाली घोड़ा-बग्घी के मालिक नगर निगम की लाइसेंस नीति का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। इसके बावजूद निगम की ओर से घोड़ा-बग्घी को पकड़ने की कोई कोशिश नहीं की गई है। करीब डेढ़ वर्ष पहले विभिन्न आयोजनों में उपयोग होने वाली घोड़ा-बग्घी के लिए लाइसेंस बनवाना आवश्यक कर दिया गया था। इस संबंध में एक लाइसेंस नीति भी बनाई गई थी। नीति में स्पष्ट निर्देश थे कि लाइसेंस नहीं होने पर घोड़ा-बग्घी को जब्त करने के साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना किया जाएगा। खास बात यह है कि न तो नगर निगम ने इस नीति को गंभीरता से लिया और न ही घोड़ा-बग्घी वालों में इसे लेकर कोई खौफ दिखाई दिया। दक्षिणी नगर निगम के अनुसार, घोड़ा-बग्घी वालों को नई लाइसेंस नीति काफी कठोर लग रही है। इसी कारण उन्होंने नई नीति के तहत एक भी लाइसेंस नहीं बनवाया। उनकी एसोसिएशन ने नीति में कुछ नियम व शर्तों पर सवाल उठाने के साथ ही उसमें संशोधन की मांग की है। उधर इसी वर्ष अस्तित्व में आई तीनों नगर निगम ने भी लाइसेंस के बिना चल रही घोड़ा-बग्घी को जब्त करने और उनके मालिकों पर जुर्माना करने में कोई रुचि नहीं ली। नगर निगम ने आगरा की भांति पर्यटकों को पार्किंग से ताजमहल तक ले जाने के लिए घोड़ा-बग्घी की व्यवस्था का सुझाव दिया था, लेकिन दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग ने उनकी राय को कोई तवज्जो नहीं दी। इसके पीछे घोड़ा-बग्गी वालों का लाइसेंस नहीं होना बताया जा रहा है। दक्षिणी नगर निगम ने पूरे मामले का अध्ययन करने के बाद अब लाइसेंस नीति में संशोधन करने का फैसला किया है।
स्थाई समिति के अध्यक्ष राजेश गहलोट ने बताया कि नीति को पूरी तरह घोड़ा-बग्घी वालों के अनुकूल बनाया जाएगा, क्योंकि लाइसेंस बनने की प्रक्रिया शुरू होने से नगर निगम को प्रतिवर्ष कई लाख रुपये राजस्व के रूप में मिलेंगे। वहीं घोड़ा-बग्घी वाले भी लाइसेंस बनवाने में रुचि लेंगे। नीति के तहत दस्तावेजों में कमी की जाएगी। इसके अलावा अनापत्ति पत्र देने की शर्त हटाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके बाद भी लाइसेंस नहीं बनवाने वाले घोड़ा-बग्घी वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
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बड़ी तादात में हैं घोड़ा-बग्घी
राजधानी में एक अनुमान के अनुसार, प्रतिवर्ष करीब चार लाख शादियां होती हैं। अधिकांश शादियों में बारात के स्वागत स्थल से विवाह मंडप तक दूल्हे को घोड़ी के बजाए घोड़ा-बग्घी पर बैठाकर ले जाया जाता है। मांग को देखते हुए दिल्ली में घोड़ा-बग्घी की संख्या अब कई हजार हो चुकी है। ये घोड़ी-बग्घी तीन प्रकार की मिलती है। इन्हें दो, चार और छह घोड़ों से खींचा जा सकता है। यानी दूल्हे के लिए लोगों को जैसी घोड़ी-बग्घी की आवश्यकता होती है, वैसी उपलब्ध कराई जाती है।