नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने मूक-बधिर व अशक्त बच्चों की शिक्षा के लिए स्पेशल एजुकेटर की भर्ती प्रक्रिया में कोताही बरतने पर दिल्ली सरकार व एमसीडी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सरकार को 2596 ऐसे शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए चार माह का समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो मुख्य सचिव सहित सभी संबंधित विभागों के प्रमुख को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में 856 व एमसीडी के स्कूलों में 1741 स्पेशल एजुकेटर भर्ती करने हैं, मगर अभी तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। अदालत ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और ऐसे में बच्चों को किस प्रकार शिक्षा मिलेगी। अदालत ने सरकार व एमसीडी को दो सप्ताह में डीएसएसएसबी के समक्ष अपनी भर्ती प्रक्रिया को रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने चार माह में भर्ती प्रक्रिया हर हाल में पूरी करने का भी निर्देश दिया है। उसने चेतावनी देते हुए कहा यदि इस अवधि में भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो अगली सुनवाई के दौरान सरकार के मुख्य सचिव, एमसीडी आयुक्त व डीएसएसएसबी के चेयरमैन को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देना पड़ेगा।
याची सोशल ज्यूरिस्ट के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि अदालत ने 16 सितंबर, 2009 को दिल्ली सरकार व एमसीडी को अपने सभी स्कूलों में दो-दो विशेष टीचर भर्ती करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा सरकार व एमसीडी के अनुसार उनके स्कूलों में करीब तीन हजार मूक-बधिर बच्चों ने दाखिला लिया हुआ है जबकि राजधानी में ऐसे करीब दो लाख बच्चे हैं।