दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में कोरोना की लहर शुरू हो गई थी। 12 अप्रैल तक अस्पतालों में 6 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हो गए थे। 22 अप्रैल के बाद हालात खराब होने लगे थे और भर्ती मरीजों की संख्या 19 हजार को पार कर गई थी।
राजधानी में कोरोना के सभी मानक नियंत्रण में है। दो महीने में पहली बार अस्पतालों में भर्ती रोगियों की संख्या तीन हजार से कम हो गई है। दिल्ली में फिलहाल 88 फीसदी बेड खाली हैं। हालांकि, आईसीयू में अभी भी 1600 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। विशेषज्ञों का कहना है प्रसार अब नहीं हो रहा है। यही कारण है कि नए मामले घट रहे हैं। इससे अस्पतालों में भी मरीज नहीं बढ़ रहे हैं।
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दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में कोरोना की लहर शुरू हो गई थी। 12 अप्रैल तक अस्पतालों में 6 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हो गए थे। 22 अप्रैल के बाद हालात खराब होने लगे थे और भर्ती मरीजों की संख्या 19 हजार को पार कर गई थी। आलम यह था कि सभी बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड भर गए थे। लेकिन अब दो महीने बाद अस्पतालों में तीन हजार से कम मरीज भर्ती हैं और 21 हजार से ज्यादा बेड खाली हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राजधानी में इस समय कोविड मरीजों के लिए 24,303 बेड हैं। इनमें से 21,367 खाली है और 2936 पर मरीज भर्ती। इस लिहाज से देखें तो 88 फीसदी बेड खाली है। वहीं, आईसीयू बेड की बात करें तो कुल 6751 आईसीयू बेड में से 1617 पर मरीज भर्ती है और 5134 खाली है। यानी, 75 फीसदी आईसीयू बेड भी खाली हो गए हैं। वहीं, सरकारी अस्पतालों की बात करें तो उनमें 80 फीसदी आईसीयू बेड खाली है, क्योकि अधिकतर गंभीर मरीजों का इलाज निजी अस्पतालों में चल रहा है।
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एम्स के विक्रम का कहना है कि अब अस्पताल में पहले के मुकाबले 10 फीसदी से भी कम मरीज भर्ती हो रहे हैं। नए दाखिले भी न के बराबर हो रहे हैं। इससे पता चलता है कि वायरस का प्रसार थम गया है। बस जरूरी है कि दिल्ली में हुए अनलॉक के बाद अब लोग लापरवाही न बरते और कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करते रहें।साथ ही भीड़भाड वाले इलाकों में जाने से बचे। क्योकि, वायरस का प्रसार कम हुआ है। यह महामारी खत्म नहीं हुई है।