दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2022-23 के स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए पहली ई-काउंसलिंग में ही अधिक सीटें भरने की तैयारी की जा रही है ताकि दाखिला प्रक्रिया लंबी न चले। प्रत्येक काउंसलिंग से पहले छात्रों को अपनी वरीयता भरने का अवसर दिया जाएगा। काउंसलिंग के दूसरे राउंड से पहले प्राथमिकताओं में बदलाव करने का विकल्प भी मिलेगा।
डीयू में पहली बार दाखिले कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेस टेस्ट (सीयूईटी) के आधार पर होने हैं। ऐसे मेें इसके संबंध में और दाखिला प्रक्रिया को जानकारी देने के लिए कुलपति ने हाल ही कॉलेज प्रिंसिपल के साथ एक बैठक की। एक कॉलेज प्रिंसिपल के अनुसार कुलपति ने प्रस्ताव दिया कि पहली ई-काउंसलिंग में निर्धारित सीटों से 20-30 फीसदी अधिक दाखिले लें।
मसलन यदि किसी कॉलेज के किसी कोर्स की 100 सीटें हैं, तो कम से कम 120 दाखिले करें जाएं। यदि दूसरी काउंसलिंग में करीब 30-40 छात्र अपनी सीट छोड़ते हैं तो 10-20 सीटों पर दाखिले की गुंजाइश रहेगी। कॉलेज प्रिंसिपल के अनुसार बीते साल तक 8 कटऑफ तक आती थी, तब दाखिला प्रक्रिया लंबी चलती थी। इससे दाखिले में स्थायित्व नहीं आता था।
डीयू चाहता है कि कम से कम काउंसलिंग में ही सीटें भर जाएं। सीयूईटी का स्कोर जारी होने के बाद डीयू में केंद्रीकृत काउंसलिंग शुरू होने की संभावना है। मालूम हो कि जुलाई के दूसरे सप्ताह में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से सीयूईटी परीक्षा आयोजित की जा सकती है। उससे पहले जुलाई के पहले सप्ताह में पंजीकरण करने के लिए डीयू का दाखिला पोर्टल शुरू हो सकता है।
वहीं, कुलपति ने कॉलेजों को कहा गया है कि वह अपने यहां स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू करें। कुछ कॉलेजों में इस प्रक्रिया को शुरु किया जा चुका है जबकि कुछ मेें अभी यह प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।