बटला हाउस एनकाउंटर के समय स्पेशल सेल के डीसीपी आलोक कुमार का कहना है कि एनकाउंटर में मोहन चंद शर्मा के शहीद होने से फोर्स का मनोबल गिर गया था। उस समय फोर्स के मनोबल के साथ-साथ जांच को जारी रखना बहुत बड़ी चुनौती थी। दोनों कामों को जारी रखा गया और आखिर में दिल्ली पुलिस की जीत हुई।
आलोक कुमार दिल्ली पुलिस से रिटायर हो चुके हैं और इस समय बीसीसीआई में एंटी करप्शन ब्रांच संभाल रहे हैं। आलोक कुमार का कहना है कि इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा व हवलदार बलवंत को गोली लगने से फोर्स का मनोबल गिर गया था। स्पेशल सेल में पुलिस ऑफिसर काफी हतोत्साहित हो गए थे। इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को आतंकियों का पकड़ने का बहुत तजुर्बा था।
इससे फोर्स का मनोबल गिर रहा था। मगर स्पेशल सेल ने प्रोफेशनल तरीके से जांच को आगे जारी रखा। कुछ दिनों बाद आतंकी पकड़ लिए गए मगर एनकाउंटर पर सवाल उठने शुरू हो गए। इसके बाद कानूनी लड़ाई शुरू हो गई थी। दिल्ली पुलिस अपनी जांच में टिकी रही। आखिर में जीत दिल्ली पुलिस की हुई।
पुलिस अधिकारी ने अपनी किताब में राजनेताओं पर किए थे सवाल खड़े
स्पेशल सेल के तत्कालीन प्रमुख व विशेष पुलिस आयुक्त रहे करनैल सिंह ने अपनी किताब ‘बटला हाउस-एन एनकाउंटर द शॉक द नेशन’ में जामिया नगर के बटला हाउस इलाके में मकान नंबर एल-18 में पुलिस ऑपरेशन के कई विवरणों को दोहराया था।
इस मामले ने एक राजनीतिक तूफान ला दिया। राजनेताओं समेत काफी लोगों ने स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के कार्यों पर सवाल उठाए। जनमत को विभाजित किया और मीडिया में एक विवादास्पद विषय बन गया जो आज तक जारी है।
उन्होंने अपनी पुस्तक में 2008 के बटला हाउस एनकाउंटर को रंग देने के लिए राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और मीडिया के एक वर्ग द्वारा फेक न्यूज और स्ट्रीट अफवाहों को उठाया था। एनकाउंटर से छह दिन पहले, 13 सितंबर 2008 को राष्ट्रीय राजधानी में पांच विस्फोटों की एक श्रृंखला में कम से कम 30 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हो गए।
एनकाउंटर पर फिल्म बनाई गई
निखिल आडवाणी के निर्देशन में इसी नाम से एक एक्शन थ्रिलर फिल्म का निर्माण हुआ। जॉन अब्राहम और मृणाल ठाकुर ने फिल्म में अभिनय किया था।