सप्ताहांत कर्फ्यू के बाद पहले दिन सोमवार को एक बार फिर मेट्रो-बस 100 फीसदी क्षमता के साथ चली। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए लागू कर्फ्यू के बाद ऐसा लगा कि लोग चंद घंटों में ही पाबंदियों का मायने भूल गए। सड़कों पर फिर पहले की तरह ही भीड़ दिखी और बसों में भी लोग सौ फीसदी क्षमता के साथ आगे बढ़े। सुबह से शाम तक हजारों निजी वाहन भी सड़कों पर नजर आए तो मार्केट में भी एहतियातों के साथ खरीदारी हुई।
सार्वजनिक परिवहन में सभी को सफर की इजाजत मिलने से जरूरी काम के अलावा घूमने के लिए भी लोग सड़कों पर उतर आए। इधर-उधर पैदल घूमने वाले कई बार मास्क ठीक से पहने दिखे तो सुरक्षा कर्मियों की लगातार उनपर नजरें टिकी हुई थीं। सुबह से ही बसों में यात्रियों की भीड़ बढ़ने लगी। दफ्तर और जरूरी काम के सिलसिले में बाहर निकलने वालों को सीट खाली न होने पर बसों में सवार नहीं होने दिया गया। बसों-मेट्रो के अंदर तो सभी के लिए मास्क पहनने की अनिवार्यता को सख्ती से लागू किया गया। लेकिन मेट्रो स्टेशन या बसों से मार्केट या दूसरे सार्वजनिक स्थलों पर मास्क ठीक से न पहनने वाले भी कई लोग दिखे।
नहीं रही कमी, बसों के लिए करना पड़ा कम इंतजार
सप्ताह के पहले दिन बसों की कमी नहीं दिखी। डीटीसी, क्लस्टर के अलावा 600 से अधिक पर्यावरण बस सेवा के तहत सड़कों पर उतार दिए जाने से यात्रियो को बसों के लिए कम इंतजार करना पड़ा। सौ फीसदी क्षमता होने की वजह से बसों में सीट की भी दिक्कत नहीं हुई। गंतव्य तक पहुंचने के लिए बसों का खूब इस्तेमाल किया। डीटीसी के एक ड्राइवर ने बताया कि निजामुद्दीन के लिए जाने वाली बस में भीड़ रोजाना की तरह थी, लेकिन सीट फुल होने पर किसी भी यात्री को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। नियमों के पालन के नाम पर सभी के लिए मास्क पहनना अनिवार्य है।
नियमों का सख्ती से नहीं हो रहा है पालन
धौला कुआं बस स्टॉप के पास दूसरे राज्यों को जाने वाली बसों में सवार होने के लिए यात्रियों के पहुंचने का सिलसिला शाम तक चलता रहा। दूर दराज के शहरों के लिए बसों में जाने वाले परिवारों के पास सामान अधिक दिखे, लेकिन बच्चों के चेहरे पर मास्क नदारद थे। संक्रमण का अधिक खतरा होने के बाद भी अंतरराज्यीय बसों में अक्सर नियमों के पालन में अनदेखी की जा रही है।
डबल मास्क लगाने की सलाह
मेट्रो के सौ फीसदी क्षमता से चलने पर यात्रियों ने राहत की सांस ली। मगर सफर के दौरान यात्रियों की भीड़ में खांसी या छींक होने पर सांसों से संक्रमण का खतरा भी बरकरार है। सभी सीटों पर यात्रियों को सफर की इजाजत थी। यात्रियों की संख्या सुबह और शाम के वक्त अधिक होने पर उन्हें खड़े रहने से मना करते हुए अगले स्टेशन पर दूसरी मेट्रो में सवार होने के लिए कहते भी मेट्रो कर्मी नजर आए। सौ फीसदी क्षमता के बीच सफर में सामाजिक दूरी का तो पालन न मुश्किल से हो रहा था, मगर दिल्ली मेट्रो की तरफ से यात्रियों को ओमिक्रॉन से संक्रमण से बचने के लिए डबल मास्क लगाने की सलाह जरूर दी जा रही है। चूंकि यात्रियों के बीच आपसी दूरी कम होती है, इसलिए मेट्रो में सफर के दौरान इसे अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।