दिल्ली में निगम चुनाव प्रचार शुक्रवार शाम को थम गया। इस दौरान सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा, कांग्रेस व आप में होड़ देखने को मिली। दिल्ली की जनता की सहूलियत के लिए सभी के अपने-अपने वादे हैं और समस्याओं के समाधान के लिए अपने तरीके भी। मतदान से पहले अमर उजाला ने तीनों दलों के प्रदेश अध्यक्षों से उनकी प्राथमिकताओं पर बात की। तीनों का कहना है कि उन्होंने लोगों को अपने हक में लामबंद करने के लिए पूरी कोशिश की है, अब फैसला जनता की अदालत में है। फिर भी, प्रचार के दौरान मिले समर्थन का हवाला देते हुए सभी ने दावा किया कि उन्हें ही निगम की सत्ता मिलेगी।
अब एमसीडी चुनाव के पांच बड़े मसले क्या हैं?
खुद को कितनी सीट देते हैं?
230 सीट। चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह लोगों का रिस्पांस मिला है, साथ ही जमीनी स्तर का हमारा जो सर्वे है। इसमें कोई संदेह भी नहीं।
अब एमसीडी चुनाव के पांच बड़े मसले क्या हैं?
कितनी सीटें मिल रही हैं...
कोई भविष्टद्रष्टा नहीं हूं। आंकड़ों का कोई दावा नहीं है। फैसला जनता करेगी।
एमसीडी चुनाव के पांच बड़े मसले क्या हैं?
मोबाइल पर ई-गवर्नेस सेवा, दिल्ली का प्रदूषण कम करना व सभी जगह हरियाली को बढ़ावा देना, संपत्ति कर में छूट, बेहतर शिक्षा और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवा।
सत्ता मिलने के बाद इन पर क्या करेंगे?
खुद को कितनी सीटें देंगे?
200 सीट। प्रचार शुरू होने के 10 दिनों के बाद हमने अंदाजा लगाया था कि 180 सीटें आएंगी, लेकिन भाजपा के साथ लोग जुड़ते चले गए। ऐसे में आंकड़ा 200 तक जा पहुंच गया है।