राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत का मामला लगातार गहराता जा रहा है। मौत के आंकड़े को लेकर दिल्ली सरकार बनाम केंद्र की स्थिति हो गई है। इस बीच दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है।
डिप्टी सीएम सिसोदिया ने अपने बयान में कहा कि केंद्र चाहता है राज्य सरकारें कहें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई। वहीं, इससे पहले उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस मामले को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल को उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मंजूरी के लिए एक फाइल भेजी थी।
मनीष सिसोदिया ने कहा था कि इससे यह पता लग सकेगा कि ऑक्सीजन की कमी के चलते कितने कोरोना मरीजों की मौत हुई थी। साथ ही उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को भी पत्र लिखकर एलजी को समिति के गठन को न रोकने का निर्देश देने का आग्रह किया था।
दिल्ली सरकार ने मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन प्रमोशन नीति- 2021 को मंजूरी दे दी है। यह नीति भविष्य में किसी भी संकट या चिकित्सा आपातकाल से निपटने के लिए दिल्ली को मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से पेश की गई है।
दिल्ली सरकार ने अलग तरीके से जवाब देने का लिया फैसला
बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन या इलाज न मिलने की वजह से जिन लोगों की मौत हुई है उनकी जानकारी केंद्र सरकार ने मांगी है। लेकिन दिल्ली सरकार ने इसका जवाब अलग तरीके से देने का फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार ने जब कमेटी बनाई थी तो उपराज्यपाल ने उसे भंग कर दिया था। इसलिए पत्र के जवाब में एलजी अनिल बैजल के निर्देश पत्र की चर्चा करने के लिए कहा गया है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के पास अप्रैल से जून के बीच ऑक्सीजन की कमी, बिस्तर न मिलने या फिर अस्पतालों के बाहर कितने लोगों की मौत हुई है? इससे जुड़ी जानकारी नहीं है।
ऑक्सीजन की कमी से एक भी मरीज की मौत न होने का दावा
उधर, दिल्ली सरकार के अस्पतालों ने भी ऑक्सीजन की कमी से एक भी मरीज की मौत न होने का दावा किया है, जिसमें केंद्र सरकार के एम्स, आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल भी शामिल है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार के लोकनायक अस्पताल, डीडीयू, बाबा भीमराव आंबेडकर और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने ऐसा कोई भी रिकॉर्ड होने से इनकार किया है।