दिल्ली के हॉटस्पॉट या अधिक प्रदूषण वाले केंद्रों की रैंकिंग में भी बदलाव आया है। लॉकडाउन के पहले दिल्ली में प्रदूषण के 10 हॉटस्पॉट में पीरागढ़ी सबसे पहले नंबर और वसुंधरा एन्क्वेल 10वें नंबर पर था। यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब (300-400) या खराब (200-300 एक्यूआई) स्तर में था।
जनता कर्फ्यू के साथ जब दिल्ली में कुछ गतिविधियां बंद हुई तो हॉटस्पॉट की संख्या आठ हो गई और सूचकांक भी 200-300 के बीच रहा। लॉकडाउन के बाद प्रदूषण का स्तर तेजी से गिरा। ज्यादातर सेंटर संतोषजनक श्रेणी में आया। प्रदूषण के नक्शा हर तरफ हरा दिखने लगा। इतना ही नहीं, हॉटस्पॉट की संख्या सिर्फ पांच बची हैं और यह औसत दर्जे में है।
पीएम व नॉक्स में आई कमी
सफर ने मार्च के पहले हफ्ते के वायु प्रदूषण की तुलना अप्रैल के पहले हफ्ते से की है। इसके मुताबिक, इस बीच पीएम 10 में 51 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, पीएम 2.5 लगभग 49 फीसदी कम हुआ है। दूसरी तरफ नॉक्स की मात्रा 60 फीसदी तक कम हुई है। सफर का मानना है कि लॉकडाउन के दौरान हवा की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव होने का अंदेशा नहीं है। अगर इसकी अवधि पंद्रह दिन बढ़ती है तो गुणवत्ता और बेहतर हो सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में रविवार की हवा की गुणवत्ता संतोषजनक रही। नोएडा व दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 87 व 94 और गाजियाबाद का 93 था। जबकि ग्रेटर नोएडा व गुरुग्राम का 98 रिकॉर्ड किया गया है। सफर का पूर्वानुमान है कि आने वाले तीन दिनों तक हवा की गुणवत्ता संतोषजनक रहेगी।