हर घर तिरंगा अभियान में पहली बार एसएचजी की भागीदारी, महिलाओं को मिलेगा रोजगार
पूरी दिल्ली में 15 लाख से अधिक तिरंगे बांटेगी सरकार, ऑनलाइन खरीद भी होगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान को केवल देशभक्ति तक सीमित न रखकर उसे आजीविका से भी जोड़ दिया है। सरकार ने पहली बार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करीब दो लाख राष्ट्रीय ध्वज तैयार कराने का फैसला किया है।
इससे अभियान को स्थानीय भागीदारी मिलेगी, वहीं समूहों से जुड़ी महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों के लिए आय का नया अवसर भी बनेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को कहा कि हर घर तिरंगा अभियान राष्ट्रीय एकता, जनभागीदारी और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का माध्यम है। सरकार चाहती है कि इस अभियान में समाज के हर वर्ग की भागीदारी हो और इसके साथ रोजगार के अवसर भी पैदा हों। इसी सोच के तहत स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्रीय ध्वज निर्माण से जोड़ा गया है। राज्य शहरी आजीविका मिशन के तहत चिन्हित पात्र स्वयं सहायता समूह करीब दो लाख राष्ट्रीय ध्वज तैयार करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे समूहों से जुड़े सदस्यों, खासकर महिलाओं को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा। साथ ही वे राष्ट्रीय अभियान का प्रत्यक्ष हिस्सा भी बनेंगे।
15 लाख से अधिक तिरंगे बांटने का लक्ष्य
सरकार ने इस साल पूरी दिल्ली में 15 लाख से अधिक राष्ट्रीय ध्वज बांटने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों से तैयार तिरंगों के अलावा ऑनलाइन बाजारों से भी ध्वज खरीदे जाएंगे, ताकि अभियान का दायरा राजधानी के हर घर तक पहुंच सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले सभी राष्ट्रीय ध्वज भारतीय ध्वज संहिता 2002, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम 1971 और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप होंगे। सरकार का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल तिरंगा बांटना नहीं, बल्कि उसके सम्मान और राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना भी है।