जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में चल रहे सूत संगम एक्सपो में काफी संख्या में पहुंच रहीं महिलाएं
ज्योति सिंह
नई दिल्ली। रंग-बिरंगे धागों से उकेरी गई कलाकारी, सुई की महीन कढ़ाई और कागज से भी हल्का कपड़ा...। जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में चल रहे सूत संगम एक्सपो में पहुंचने वाली महिलाओं की नजरें इन साड़ियों पर ठहर जा रही हैं। वहीं, इस एक्सपो को नेशनल डिजाइन सेंटर और इंडिया हैंडलूम के सहयोग से वस्त्र मंत्रालय ने आयोजित किया है। यहां, पश्चिम बंगाल की पारंपरिक कंथा कढ़ाई से सजी ये साड़ियां अपनी खूबसूरती, हल्के वजन और हस्तनिर्मित डिजाइन के कारण खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। एक्सपो में स्टॉल नंबर-20 पर पंजाब से आईं लेकिन मूलरूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली सोनिया मोहाली कंथा वर्क की कॉटन साड़ियां और सूट लेकर पहुंची हैं। उनकी स्टॉल पर महिलाएं न सिर्फ साड़ियों की बारीकी से बनी कढ़ाई देख रही हैं, बल्कि खरीदारी भी कर रही हैं। यहां कॉटन कंथा साड़ियां दो हजार रुपये और सूट डेढ़ हजार रुपये से उपलब्ध हैं।
क्या है कंथा वर्क
सोनिया बताती हैं कि कंथा भारत की सबसे प्राचीन हस्तकढ़ाई परंपराओं में से एक है, जिसकी शुरुआत पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में हुई। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि पूरी कढ़ाई हाथ से की जाती है। मशीन का इस्तेमाल नहीं होता। केवल सुई और धागे से महीन रनिंग स्टिच के जरिए डिजाइन तैयार किए जाते हैं। यही वजह है कि दो कंथा साड़ियां कभी एक जैसी नहीं होतीं। इन साड़ियों पर फूल-पत्तियां, पक्षी, मछलियां, पेड़, लोकजीवन और ज्यामितीय आकृतियां उकेरी जाती हैं। एक अच्छी कंथा साड़ी तैयार करने में कई दिनों से लेकर कई सप्ताह तक का समय लग सकता है।
कागज जितनी हल्की, हर मौसम के लिए आरामदायक
सोनिया के अनुसार, उनकी अधिकांश साड़ियां शुद्ध कॉटन की हैं और इतनी हल्की हैं कि उनका वजन कागज जैसा महसूस होता है। यही कारण है कि इन्हें लंबे समय तक पहनना भी बेहद आरामदायक रहता है। गर्मियों में इनकी मांग सबसे अधिक रहती है।
ऑफिस से शादी तक हर मौके की पसंद
कंथा वर्क साड़ियां पारंपरिक शिल्प और आधुनिक फैशन का सुंदर मेल हैं। इन्हें ऑफिस, कॉरपोरेट मीटिंग, स्कूल-कॉलेज, त्योहार, पारिवारिक समारोह और शादी जैसे हर अवसर पर पहना जा सकता है। हल्के कपड़े पर की गई बारीक हस्तकढ़ाई इन्हें प्रीमियम और आकर्षक लुक देती है।
पुरानी परंपरा, नई पहचान
कंथा कला की शुरुआत पुराने कपड़ों को दोबारा उपयोग में लाने की परंपरा से हुई थी। समय के साथ यह शिल्प भारतीय फैशन उद्योग का अहम हिस्सा बन गया। आज कंथा वर्क केवल साड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सूट, दुपट्टे, जैकेट, स्टॉल, कुर्ते और होम फर्निशिंग उत्पादों में भी इसका व्यापक उपयोग हो रहा है।
क्यों खास है कंथा वर्क
पूरी तरह हाथ से की गई कढ़ाई
हर साड़ी होती है यूनिक
कॉटन होने से बेहद हल्की और आरामदायक
एक साड़ी तैयार करने में लगते हैं कई दिन या कई सप्ताह
पारंपरिक कला और आधुनिक फैशन का अनूठा संगम
ऑफिस, त्योहार, शादी और रोजमर्रा के पहनावे के लिए उपयुक्त