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उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वकीलों की नियुक्ति करने को कहा

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नई दिल्ली। दिल्ली दंगा मामले में एक बार फिर दिल्ली के उपराज्यपाल व आम आदमी पार्टी आमने-सामने आ गई है। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को पत्र लिखकर कहा कि दिल्ली पुलिस की ओर से प्रस्तावित छह वकीलों की नियुक्ति दंगा मामलों में जिरह के लिए एक सप्ताह में करें। इस पर पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस कुछ लोगों को फंसाने व कुछ को बचाने में जुटी है।
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उपराज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लिखे पत्र में यह भी कहा कि दिल्ली सरकार के मंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव पर अभी तक सहमति नहीं दी है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में दंगों के 85 मामलों में अपनी ओर से बहस करने के लिए छह वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नियुक्त करने का प्रस्ताव किया है। इन वकीलों को दंगों से जुड़े 24 मामले जिरह के लिए सौंपे हैं।
आम आदमी पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि दिल्ली दंगों और सीएए विरोध से संबंधित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को अवरुद्ध करने के लिए उपराज्यपाल लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह दंगे दिल्ली और पूरे देश पर धब्बा थे। आप सरकार दंगों में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए पुलिस द्वारा स्वतंत्र जांच के साथ निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है।
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उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल और केंद्र सरकार द्वारा एक पैनल की नियुक्ति का दबाव बनाया जा रहा है। यह तब हो रहा है, जब दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया पर बहुत गंभीर आरोप लगे हैं। ऐसी खबरें हैं कि दिल्ली पुलिस कुछ लोगों को फंसाने में लगी हुई है और कुछ को बचाने में। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि इन मामलों के लिए सरकारी वकील स्वतंत्र हों।
संजय सिंह ने कहा यदि वे केंद्र सरकार के अधीन हैं और खुद दिल्ली पुलिस द्वारा नियुक्त किए गए तो उनकी स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न होगा। इसलिए जरूरी है कि दिल्ली सरकार द्वारा चुने गए वकीलों का पैनल अदालतों में इन मामलों का प्रतिनिधित्व करें।
वहीं आप विधायक राघव चड्ढा ने कहा कानून में स्पष्ट है कि लोक अभियोजक पुलिस का नहीं, बल्कि राज्य का प्रतिनिधि है। 2016 में दिल्ली के उच्च न्यायालय और 2017 में सर्वोच्च न्यायालय (डिवीजन बेंच) के आदेशों द्वारा इसी सिद्धांत को बरकरार रखा गया है और लोक अभियोजकों को नियुक्त करने की शक्ति पूरी तरह से दिल्ली सरकार को दी गई है। दिल्ली पुलिस जांच एजेंसी है, इसलिए वकीलों को तय करने में कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा जब दिल्ली के गृहमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार द्वारा सुझाए वकीलों के पैनल को नियुक्त करने पर कड़ी आपत्ति जताई, तो एलजी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गृहमंत्री के फैसले पर असहमति जताई और एक सप्ताह के अंदर मंत्रि परिषद को इस मामले पर विचार करने और दिल्ली पुलिस के वकीलों के पैनल को संस्तुति देने के निर्देश दिए हैं।
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