डॉक्टरों के अनुसार यह मामला दुर्लभ इसलिए है क्योंकि दो घंटे और देरी होने पर संदीप आजीवन अपना अंगूठा वापस नहीं ले पाता। डॉक्टरों ने बताया कि कटे हुए अंगूठे को 24 घंटे के भीतर ठंडे कंटेनर में रखा जाए या बर्फ से घेर कर रखा जाए तो फिर से जोड़ा जा सकता है। लेकिन प्राथमिक इलाज करने के बाद दुर्घटना के दिन ही संदीप दुबई से भारत आ चुका था। इसमें करीब 22 घंटे का समय निकल चुका था।
निदेशक व हड्डीरोग विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष चौधरी ने बताया कि अंगूठा हमारी हथेली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है क्योंकि हम इसका उपयोग करके 45 फीसदी से ज्यादा काम करते हैं। जब संदीप अस्पताल पहुंचा तो चोट वाली जगह की स्थिति गंभीर थी क्योंकि कटे हुए हिस्से को बाकी की उंगली से जोड़ा गया था और उसका काफी खून बह चुका था।
महज 10 मिनट में ही मरीज को ऑपरेशन के लिए ले गए और करीब छह घंटे में पूरी प्रक्रिया में लगे। 'रीइम्प्लांटेशन' की प्रक्रिया में काफी समय लगता है। माइक्रोस्कोप के जरिए नसों इत्यादि पर काम किया। जब वह ठीक हो गए तो उन्हें पांच दिन बाद छुट्टी दे दी गई।
ऐसी घटना होने पर आपको यह करना जरूरी
अस्पताल के डॉ. नीरज गोडरा ने एक सवाल पर कहा कि इस तरह की दुर्घटना होने पर लोगों को सबसे पहले घायल हिस्से को एक पॉलीबैग में रखना चाहिए और दूसरे बर्फ से भरे बैग से इसे सटा दें। किसी भी परिस्थिति में क्षतिग्रस्त हिस्से और बर्फ के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं होना चाहिए। इसके अलावा जितना जल्दी हो सके नजदीकी अस्पताल जाएं क्योंकि कटे हुए हिस्से यानी अंगुली और अंगूठा 24 घंटे में दोबारा जोड़ा जा सकता है।