शरीर में खून की कमी से एचबीए1सी पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने के लिए यह शोध किया गया था। शोध में 18 से 65 वर्ष तक के एनीमिया पीड़ित 100 लोगों को शामिल किया गया था। सितंबर 2022 से लेकर फरवरी 2024 की अवधि के बीच में यह शोध हुआ था। अस्पताल के मेडिसिन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुलदीप कुमार ने बताया कि तीन विभागों ने मिलकर यह शोध किया। इसमें मेडिसिन, कम्युनिटी मेडिसिन और पैथोलॉजी विभाग शामिल हुए। इस शोध का हिस्सा डॉ. अदिति सिंह भी रही है। इस शोध में एनीमिया से जूझने वाले मरीजों और स्वस्थ लोगों को लेकर दो अलग-अलग समूह बनाए गए। मरीजों वाले समूह में 22 पुरुष और 28 महिलाएं थी।
इतने ही लोग स्वस्थ समूह वाले शामिल थे। मरीज वाले समूह में हीमोग्लोबिन का औसत स्तर 9.93 था जो एनीमिया को दर्शाता है जबकि स्वस्थ समूह वाले समूह के हीमोग्लोबिन का औसत स्तर 13.56 था। शोध में सामने आया कि मरीजों वाले समूह में एचबीए1सी का स्तर 5.07 ग्राम फीसदी अधिक देखने को मिला। वहीं, स्वस्थ समूह में एचबीए1सी का स्तर 4.68 फीसदी दर्ज किया गया। इसके अलावा जिनमें एनीमिया की हल्की कमी उनमें एचबीए1सी 4.92 फीसदी, मध्यम श्रेणी वालों में एचबीए1सी 5.15 फीसदी और गंभीर एनीमिया वाले मरीजों में एचबीए1सी का स्तर 5.20 फीसदी अधिक देखने को मिला।
एनीमिया और एचबीए1सी में महत्वपूर्ण संबंध
उन्होंने कहा कि इस शोध से स्पष्ट है कि एनीमिया की कमी और एचबीए1सी स्तरों के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध है। एनीमिया की गंभीरता बढ़ने के साथ एचबीए1सी का स्तर भी बढ़ा देखा गया। साथ ही हीमोग्लोबिन और एचबीए1सी के स्तरों के बीच एक नकारात्मक सह संबंध देखने को मिला। एचबीए1सी के परिणामों की व्याख्या करते समय एनीमिया के प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।