फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नकदी विवाद: जस्टिस वर्मा का इलाहाबाद HC में तबादला, केंद्रीय अधिसूचना जारी; SC बोला- न्यायिक काम से दूर रहेंगे

Fri, 28 Mar 2025 03:22 PM IST
श्याम जी. पीटीआई, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट के प्रशासनिक पक्ष के न्यायाधीशों की हाल ही में ही समिति गठित की गई। इसमें न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का उल्लेख नहीं किया गया। 
विज्ञापन
जस्टिस यशवंत वर्मा - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का शुक्रवार को उनके पैतृक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया। विधि मंत्रालय ने उनके तबादले की घोषणा करते हुए एक अधिसूचना जारी की। इस सप्ताह की शुरुआत में उनके तबादले की सिफारिश करते हुए सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने कहा था कि यह कदम होली की रात आग लगने की घटना के बाद न्यायमूर्ति वर्मा के घर से नकदी मिलने के कथित मामले की आंतरिक जांच से अलग है। केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक अन्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सी.डी. सिंह को भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर दिया है।
विज्ञापन

 

तबादले के बाद सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया गया है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्यभार ग्रहण करें, तो फिलहाल उन्हें कोई न्यायिक कार्य न सौंपा जाए।



नकदी बरामदगी विवाद में उलझे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का दिल्ली हाईकोर्ट के प्रशासनिक पक्ष के न्यायाधीशों की हाल ही में गठित समितियों में उल्लेख नहीं किया गया। 14 मार्च को न्यायाधीश के आधिकारिक आवास में आग लगने के बाद जली हुई गड्डियां मिलने के बाद कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं। 
विज्ञापन


हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने इसे एक अलग निर्णय बताया है, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति वर्मा को हाल ही में उनके पैतृक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई थी। वे पहले भी ऐसी कई प्रशासनिक समितियों का हिस्सा रहे हैं। उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर प्रकाशित 27 मार्च के परिपत्र के अनुसार, समितियों का 26 मार्च से तत्काल प्रभाव से पुनर्गठन किया गया। 

यह भी पढ़ेंः Supreme Court: जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में एफआईआर की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका अपरिपक्व बताकर खारिज की

पुनर्गठित की गई 66 समितियों में प्रशासनिक और सामान्य पर्यवेक्षण, अधिवक्ताओं के लिए शिकायत निवारण समिति, आकस्मिक व्यय की मंजूरी के लिए वित्त और बजट और सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अलावा पांच लाख रुपये से अधिक के घाटे को बट्टे खाते में डालने की समिति शामिल है। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय सहित अन्य सभी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विभिन्न समितियों में शामिल हैं।
विज्ञापन


इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद न्यायमूर्ति वर्मा से काम वापस ले लिया गया था। 22 मार्च को मुख्य न्यायाधीश ने आरोपों की आंतरिक जांच करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की और मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय की जांच रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने का फैसला किया, जिसमें कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी मिलने की तस्वीरें और वीडियो शामिल थे। न्यायमूर्ति वर्मा ने किसी भी तरह के आरोप की निंदा की और कहा कि उनके या उनके परिवार के किसी भी सदस्य ने स्टोररूम में कभी कोई नकदी नहीं रखी।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें