5 जनवरी 2020 का दिन जेएनयू के लिए काला दिन था। वामपंथी छात्रों ने कैंपस टी-प्वाइंट से लेकर साबरमती हॉस्टल तक लाठी-डंडो, लोहे की राड से छात्र-छात्राओं पर हमला किया और तोड़फोड़ की। करीब 40 से 50 नकाबपोश कैंपस में घुसे थे। मेरे साथ हमारे कार्यकर्ता गंभीर रूप से जख्मी हुए। हमने आठ वीडियो पुलिस को भी दिए।-शिवम चौरसिया, अध्यक्ष, एबीवीपी, जेएनयू।
एबीवीपी ने घटना को दिया अंजाम:
यह सब साजिश एबीवीपी ने की थी। हमने पुलिस को वीडियो भी दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने अब तक मामले की पूरी जांच तक नहीं की है। मेरे सिर पर डंडे से हमला किया गया था।-आईषी घोष, वामपंथी छात्र संगठन की कार्यकर्ता व अध्यक्ष जेएनयू छात्रसंघ।
एबीवीपी ने फोटो प्रदर्शनी में दिखाया दर्द:
कैंपस हिंसा का एक वर्ष पूरे होने की पूर्व संध्या पर एबीवीपी ने फोटो प्रदर्शनी लगाई। इसमें हिंसा से जुड़े फोटो को दर्शाया गया। इसमें दर्शाया गया है कि नकाबपोश गुड़ों से एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने कैंपस के जंगलों, टायलेट, लोगों के घरों में छिपकर अपनी जान बचाई। उन्हें सरेआम जान से मारने की धमकी दी जाती। महिला कार्यकर्ता को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।