-प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन से अध्यक्ष पद की उम्मीदवार ने सीपीओ मैनुअल की फाड़ी प्रति
-प्रेसिडेंशियल डिबेट पर निगरानी के लिए यूनिवर्सिटी के अधिकारी रहे मौजूद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ चुनाव को लेकर प्रेसिडेंशियल डिबेट रविवार देर रात को शांतिपूर्वक संपन्न हुई। डिबेट में भाषण पर निगरानी रखने के लिए यूनिवर्सिटी के अधिकारी भी मौजूद रहे। इस डिबेट में कैंपस के मुद्दों से ज्यादा राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ज्यादा चर्चा हुई।
प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार शिंदे विजयलक्ष्मी ने चीफ प्रॉक्टर मैनुअल (सीपीओ) की प्रति फाड़कर खूब तालियां बटोरी। सीपीओ को सुरक्षा का नहीं निगरानी का प्रतीक बताया। शिंदे ने कहा कि इस परिसर में हर जगह बैरिकेड्स हैं, लेकिन न्याय के इर्द-गिर्द नहीं। आरएसएस की परेड के लिए जगह है। मगर, विरोध सभाओं के लिए नहीं। उन्होंने शेर सुनाते हुए कहा कि लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में। शिंदे ने अपने भाषण में राष्ट्रवाद, पर्यावरण और सामाजिक न्याय के विषयों को भी शामिल किया।
डिबेट के दौरान उम्मीदवारों ने प्रशासन को भी आड़े हाथ लिया। कई उम्मीदवारों ने लाइब्रेरी की गिरती छत, छात्रों की घटती संख्या, चीफ प्रॉक्टर मैन्युअल (सीपीओ), दिव्यांगों के लिए सुविधाओं का अभाव सहित छात्रों से जुड़े दूसरे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। इस प्रेसिडेंशियल डिबेट में सात उम्मीदवारों में से छह उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बापसा) के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार राज रत्न राजोरिया पारिवार में कुछ हादसा हो जाने के चलते डिबेट में शामिल नहीं हो सकें। डूसू अध्यक्ष आर्यन मान सहित डीयू के छात्र भी शामिल हुए। डूसू संयुक्त सचिव दीपिका झा द्वारा प्रोफेसर को थप्पड़ मारने का मामला भी डिबेट में सामने आया।
एनएसयूआई उम्मीदवार विकास ने कैंपस में वामपंथी और दक्षिणपंथी द्वंद्व के चलते असली मुद्दों के गौण होने के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि वामपंथियों ने परिसर को बर्बाद कर दिया है। जबकि दक्षिणपंथी उस बर्बादी पर फल-फूल रहे हैं।
एबीवीपी से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विकास पटेल को भाषण के दौरान भारी विरोध का सामना करना पड़ा। विकास पटेल ने एबीवीपी की उपलब्धियों को भी गिनाया। विकास ने वामपंथी छात्र संगठनों पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन के साथ उनकी सांठगांठ के कारण जेएनयू के चारों ओर बैरिकेड्स लगे हैं। उनका चौथा साथी खुद जेएनयू प्रशासन है।
वामपंथी छात्र संगठनों की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार आदिति मिश्रा ने कहा कि हम फिलिस्तीन, कश्मीर के राज्य के दर्जे, लद्दाख के पर्यावरण और सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे। बुलडोजर से घर गिराने सहित उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे कार्यकर्ताओं को जेल में रखे जाने को लेकर विरोध दर्ज कराया।
निर्दलीय उम्मीदवार अंगद सिंह ने वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्र संगठनों को घेरा। वहीं दिशा दिशा छात्र संगठन के उम्मीदवार शिरसावा इंदू ने शैक्षणिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।