दिल्ली उच्च न्यायालय ने अल फलाह ट्रस्ट से जुड़े धन शोधन निवारण अधिनियम मामले में जवाद अहमद सिद्दीकी को तीन दिन का अभिरक्षा अवकाश दिया है। यह अवकाश उसे अपनी गंभीर रूप से बीमार पत्नी से मिलने के लिए प्रदान किया गया है। यह अनुमति 21, 23 और 25 जुलाई को दी गई है।
सिद्दीकी पर दो अलग-अलग धन शोधन मामलों में आरोप लगाए गए हैं। उसने अपनी कर्क रोग से पीड़ित पत्नी से मिलने के लिए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगी थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने उसकी इस अंतरिम जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में सिद्दीकी के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों पर विचार किया। न्यायालय ने मामले में उसकी भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना। धन शोधन निवारण अधिनियम के जमानत संबंधी कड़े प्रावधानों का भी अदालत ने उल्लेख किया। यह अधिनियम धन शोधन जैसे गंभीर अपराधों से निपटने के लिए बनाया गया है। न्यायालय ने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अंतरिम जमानत देने से इन्कार किया।
अवकाश और जमानत याचिका
जवाद सिद्दीकी को अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए तीन दिन का अभिरक्षा अवकाश मिला है। यह अवकाश उसे 21, 23 और 25 जुलाई को दिया गया है। उसने अपनी कर्क रोग से पीड़ित पत्नी के लिए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगी थी। हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसकी अंतरिम जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने केवल सीमित अवधि के लिए अभिरक्षा अवकाश प्रदान किया।
न्यायालय का निर्णय और प्रावधान
दिल्ली उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुए गंभीर आरोपों पर विचार किया। अदालत ने मामले में जवाद सिद्दीकी की कथित भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना। न्यायालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम के जमानत संबंधी प्रावधानों का उल्लेख किया। ये प्रावधान ऐसे मामलों में जमानत के लिए सख्त शर्तें निर्धारित करते हैं। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अंतरिम जमानत नहीं दी गई।