दीपावली पर नॉन ग्रीन पटाखे बेचना ही नहीं, जलाना भी मुसीबत का कारण बन सकता है। वर्ष 2018 में दीपावली से पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में नॉन ग्रीन पटाखे बेचने और जलाने दोनों पर पाबंदी लगा दी थी। अब कोई पटाखे बेचता हुआ या जलाता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ सरकारी आदेश के उल्लंघन (आईपीसी की धारा 188) का मामला दर्ज किया जाएगा।
पुलिस कर रही ये उपाय
30 से 50 प्रतिशत तक कम होता है प्रदूषण
ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं। इनके जलने से प्रदूषण 30 से 50 प्रतिशत तक कम होता है। इससे आपकी दीपावली का मजा भी कम नहीं होगा, साथ ही ये पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाएंगे। ग्रीन पटाखे दिखने, जलने और आवाज में सामान्य पटाखों की तरह होते हैं। फिलहाल बाजार में तीन तरह के ग्रीन पटाखे हैं। एक जलने के साथ पानी पैदा करता है, जिससे सल्फर और नाइट्रोजन जैसी हानिकारक गैसें इन्हीं में घुल जाती हैं। इन्हें सेफ वाटर रिलीजर भी कहा जाता है।
दूसरी तरह के पटाखों को स्टार क्रैकर के नाम से जाना जाता है। यह सामान्य से कम सल्फर और नाइट्रोजन पैदा करते हैं। इनमें एल्यूमिनियम का इस्तेमाल कम से कम किया जाता है। तीसरी तरह के पटाखे अरोमा क्रैकर्स हैं, जो कम प्रदूषण के साथ-साथ खुशबू भी पैदा करते हैं।
ग्रीन पटाखे ही जलाएं। नॉन ग्रीन पटाखे जलाने से बचें। कानून का पालन करें और अधिकृत विक्रेता से ही ग्रीन पटाखे खरीदें। फिलहाल राजधानी में 15 विक्रेताओं को ग्रीन पटाखों का लाइसेंस दिया गया है।