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जहांगीरपुरी हिंसा दिल्ली पुलिस की नाकामी : कोर्ट

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नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने पिछले महीने जहांगीरपुरी हिंसा को दिल्ली पुलिस की नाकामी बताया है। अदालत ने माना है कि हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर अनधिकृत तरीके से निकाले गए जुलूस को रोकने में दिल्ली पुलिस विफल रही है, जिसके कारण इलाके में सांप्रदायिक झड़पें हुईं।
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अदालत ने इस मामले से जुड़ी जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसा लगता है, इस मुद्दे को दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने दरकिनार कर दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि दिल्ली पुलिस कर्मियों की मिलीभगत से यह झड़पें हुई हैं, इसकी जांच की जानी चाहिए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गगनदीप सिंह ने कहा है कि संबंधित अधिकारियों को अपना दायित्व निभाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो। इस मामले में पुलिस की संलिप्तता की जांच की जानी चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया है कि 7 मई को पारित आदेश की एक प्रति पुलिस आयुक्त को सूचना और फिर से ऐसा न हो इसके अनुपालन के लिए भेजी जाए। न्यायाधीश ने कहा कि राज्य की ओर से साफ बताया गया है कि जिस जुलूस के दौरान दंगे हुए, वह पुलिस की पुलिस की अनुमति के बिना किया गया था। अदालत ने कहा कि 16 अप्रैल को हुई घटनाओं का क्रम और घटना को रोकने व कानून व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय प्रशासन की भूमिका को देखने की जरूरत है। एफआईआर को देखने से पता चलता है कि जहांगीरपुरी थाने के स्थानीय कर्मचारी, अधिकारी अवैध जुलूस को रोकने के बजाय उसके साथ चल रहे थे। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि स्थानीय पुलिस ने शुरू में ही जुलूस को रोकने और भीड़ को तितर-बितर करने के बजाय पूरे रास्ते में उनका साथ दिया, जिससे बाद में दोनों समुदायों के बीच दुर्भाग्यपूर्ण दंगे हुए।
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