जहांगीरपुरी में शोभायात्रा पर हुए पथराव के बाद भड़की हिंसा मामले में रोज नई जानकारी सामने आ रही है। अब पता चला है कि मुख्य आरोपी अंसार सी-ब्लाक जहांगीरपुरी का सबसे धनी व्यक्ति है। वह लोगों को पैसे ब्याज पर देता था। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि क्या उसे पैसे की फंडिंग होती थी? वहीं, पुलिस ने पांच अन्य आरोपियों की पहचान की है। इन आरोपियों के कोर्ट से गैर जमानती वारंट लिए हैं।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हिंसा का मुख्य आरोपी अंसार (35) इलाके में पैसे वाला था। वह लोगों को पैसे बांटता था। उसकी इलाके में दहशत और इज्जत बहुत ज्यादा थी। अंसार सबसे पहले आर्म्स एक्ट के मामले में जेल गया था। बाहर आते ही उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद इसने सट्टेबाजी शुरू कर दी थी। उसके खिलाफ सट्टेबाजी के पांच मामले भी दर्ज हैं। वह इलाके में कबाड़ियों को सड़क किनारे कब्जा करवाता था। जो दुकान ढहाई गई है उन पर ज्यादातर अंसार ने ही कब्जा करवाया था। वह फाइनेंस का काम करता था और इलाके में लोगों को पैसे ब्याज पर देता था।
अपराध शाखा के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अपराध शाखा ने मोबाइल नंबर और सीसीटीवी फुटेज से पांच अन्य आरोपियों की पहचान की है। इनमें नाम सनवर कालिया, सद्दाम खान, अनवर, चांद और सलमान हैं। सभी जहांगीरपुरी के रहने वाले हैं। पुलिस ने इनके घर कई बार दबिश दी थी, मगर हाथ नहीं आ सके। इसके बाद पुलिस ने इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करवाया है।
हिंसा के 5 मुख्य आरोपियों को आठ दिन के रिमांड पर भेजा
अदालत ने जहांगीरपुरी हिंसा के 5 मुख्य आरोपियों को 8 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। वहीं, चार अन्य आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पांचों आरोपी अंसार, सलीम, दिलशाद, सोनू और अहीर के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया है। शनिवार को सभी 9 आरोपियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये रोहिणी कोर्ट में पेश किया गया।
अपराध शाखा के जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि मामला संवेदनशील है और साजिश में शामिल अन्य आरोपियों का पता लगाने के लिए आगे की जांच की जानी है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान आरोपियों को पश्चिम बंगाल और अन्य जगहों पर ले जाने की जरूरत हो सकती है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि जांच हित में आरोपियों का आठ दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया जाए।
नाबालिग का बोन टेस्ट कराएगी पुलिस
जहांगीरपुरी हिंसा मामले में गिरफ्तार एक नाबालिग की उम्र का पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस जल्द ही हड्डी का परीक्षण (बोन टेस्ट) कराएगी। पुलिस के सूत्रों से जानकारी मिली है कि मामले में गिरफ्तार एक आरोपी के माता-पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दावा किया कि उनका बच्चा नाबालिग है। कानून के अनुसार पुलिस केवल किशोरों को ही पकड़ सकती है, उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती। ऐसे में पुलिस अब बोन टेस्ट करवाना चाहती है।
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने शनिवार को बताया कि जहांगीरपुरी हिंसा मामले में अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि दो नाबालिगों को पकड़ा है। अब तक पुलिस ने नाबालिग होने का दावा करने वाले एक आरोपी की हड्डी का परीक्षण करने का फैसला किया है। इस आरोपी को पुलिस ने 17 अप्रैल को गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि उसकी उम्र 21 साल है, जबकि आरोपी के परिवार ने हाईकोर्ट पहुंचकर उसके नाबालिग होने का सर्टिफिकेट दिया और उसे नाबालिग मानकर किशोर न्याय बोर्ड भेजा गया।