नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) ने कॉलेजों के शिक्षकों को वेतन नहीं दिए जाने के मामले की जांच सीएजी से कराने की मांग की है। संगठन चाहता है कि मामले की जांच डीयू प्रशासन और कॉलेज स्तर पर भी हो लेकिन जांच के कारण शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन न रोका जाए।
संगठन का कहना है कि सरकार ने बजट बढ़ाकर दोगुना कर दिया है, फिर भी कॉलेज वेतन नहीं दे पा रहे हैं। प्रशासन कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी का चयन नहीं होने दे रहा है।
दिल्ली सरकार से सौ फीसदी वित्त पोषित दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध 12 कॉलेजों में बीते तीन माह से शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। इस मामले में डीटीए ने आप मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि मामले की जांच सीएजी से करानी चाहिए। संगठन के सचिव डॉ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि दिल्ली सरकार जानबूझ कर शिक्षकों का वेतन नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कि इस मामले के समाधान के लिए सोमवार को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से भी मुलाकात की थी। डॉ सिंह ने कहा कि डीयू के जो कॉलेज हैं। उनमें तीन स्तर की जांच होती है, सीएजी द्वारा जांच की जाती है, प्रशासन द्वारा जांच की जाती है और कॉलेज का अपना भी एक जांच विभाग होता है। हम लोगों की यह मांग है कि यह जांच होनी चाहिए। इस संबंध में हम लगातार सरकार के संपर्क में हैं।
डीटीए के प्रभारी डॉ हंसराज सुमन ने कहा कि पहले जिस की सरकार होती थी उसी सरकार से संबंधित कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में चेयरमैन और कोषाध्यक्ष के पद पर चयनित होते थे। वर्ष 2012-13 में कॉलेजों को 121.82 करोड़ों रुपये आवंटित किये गये थे। बीते पांच सालों में यह बजट बढ़ाकर लगभग 243 करोड रुपये कर दिया गया है। बावजूद कॉलेज वेतन नहीं दे पा रहे हैं। इसकी सच्चाई पता चलना जरूरी है।