उच्च न्यायालय ने बुधवार को नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के लिए दोषी को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई न्यूनतम 14 साल की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि पोस्को मामले में दोषी ठहराए गए अपराधी के पास बच्ची के पिता ने बतौर अभिभावक के रूप में छोड़ा था ,क्योंकि वह दूर रहता था। दोषी ने विश्वास का दुरुपयोग कर पीड़िता के जीवन और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने निचली अदालत द्वारा दोषी की ओर से सजा के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए कहा यह अपराध निंदनीय है। पीठ ने अपीलकर्ता के उस तर्क को खारिज कर दिया कि दोषी की उम्र 60 वर्ष है और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य होने के साथ-साथ एक अविवाहित बेटी है। अदालत ने कहा, अपराध की प्रकृति, गंभीरता को देखते हुए उसे उचित सजा मिली है।
हाईकोर्ट ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को कृपाण रखने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा के रिपोर्टिंग समय से एक घंटे पहले केंद्र पर पहुंचने के निर्देश जारी करने को कहा है। अदालत ने कहा कि बोर्ड ऐसे अभ्यर्थियों को अग्रिम सूचना दे, ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने एक सिख महिला को कड़ा पहनने के कारण डीएसएसएसबी द्वारा आयोजित परीक्षा में न बैठने देने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
अदालत ने कहा यह उम्मीद की जाती है कि न केवल डीएसएसएसबी बल्कि अन्य सभी भर्ती एजेंसियां परीक्षा आयोजित करने से पहले इस संबंध में उचित कदम उठाएंगी। अधिवक्ता कपिल मदन और गुरमुख सिंह के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि उपरोक्त कार्रवाई भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, जिसने उसे सिख धर्म का पालन करने और उसे मानने की अनुमति दी गई है।
याचिकाकर्ता ने तर्क रखा कि अधिकारियों ने प्रवेश पत्र के साथ समय पर पहुंचने के बावजूद याची को पिछले साल जुलाई में आयोजित पीजीटी-अर्थशास्त्र (महिला) के पद पर चयन के लिए परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी थी। उसे बताया गया कि जब तक वह अपना धातु का कड़ा हटा नहीं देती, उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अदालत ने कहा यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि डीएसएसएसबी जैसी विशेष संस्था ने समय पर इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया। बोर्ड को बताना चाहिए था कि यदि वे कड़ा या कृपाण पहनने के इच्छुक हैं तो उन्हें रिपोर्टिंग समय से कम से कम एक घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना आवश्यक है।
दूसरी ओर, डीएसएसएसबी ने सभी आरोपों को गलत बताया। बोर्ड ने कहा कि कड़ा या कृपाण पहनने वाले सभी सिख उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई है, बशर्ते वे रिपोर्टिंग समय से एक घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें।