इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स की ओर से हुए सम्मेल में डीयू कुलपति बोले
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत को अपने चिकित्सकों, वैज्ञानिकों और माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसरों पर गर्व है, जिन्होंने कोविड महामारी जैसे कठिन समय में भारत में वैक्सीन बना दी। यह भारत के गर्व की कहानी है। डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने यह बातें वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और विशेषज्ञों के राष्ट्रीय सम्मेलन में कही। इस अवसर पर उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने में माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी बल दिया।
सम्मेलन का आयोजन इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स की ओर से 29 अक्टूबर से 2 नवम्बर तक किया गया था। यह सम्मेलन क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी संक्रमण नियंत्रण और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति पर केंद्रित था। इस राष्ट्रीय कांग्रेस में उभरते रोग जनकों एएमआर और नैदानिक नवाचारों पर चर्चा के लिए अग्रणी विशेषज्ञ एकत्रित हुए थे। इस सम्मेलन में देशभर के 150 से अधिक संस्थानों से आए 1800 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन की वैज्ञानिक रूपरेखा में उभरते संक्रामक रोग, एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस डायग्नोस्टिक इनोवेशन संक्रमण की रोकथाम और भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों की तैयारी जैसे विषय शामिल रहे। सम्मेलन में महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए जो रोगों के सटीक निदान, संक्रमण की रोकथाम और एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं।