दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में गड़बड़ ईवीएम के इस्तेमाल के मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। कांग्रेस पार्टी के छात्र संगठन एनएसयूआई ने मुद्दे पर जमकर रार ठानने का निर्णय लिया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अजय माकन ने इसी मुद्दे पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। एनएसयूआई गड़बड़ ईवीएम के प्रयोग को अदालत में चुनौती देने पर विचार कर रही है।
अदालत जा सकती है एनएसयूआई
कांग्रेस पार्टी के मीडिया विभाग के सचिव विनीत पुनिया का भी कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्रसंघ चुनाव एक गंभीर मुद्दा है। चुनाव में चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित कंपनी की ही ईवीएम इस्तेमाल में लाई गई है। ईवीएम के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं। पुनिया का कहना है कि एनएसयूआई इस मामले में कानूनी राय ले रहा है। जल्द ही इसे लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। दिल्ली विश्विवद्यालय चुनाव में सचिव पद पर विजयी एकमात्र एनएसयूआई के छात्र नेता आकाश ने कहा कि चुनाव में गड़बड़ ईवीएम का प्रयोग किया गया था, इसी कारण सही नतीजे नहीं आ सके हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की रिटर्निंग अधिकारी पिंकी शर्मा ने भी कहा है कि ईवीएम ईसीआईएल (इलेक्टानिक्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) से आई हैं। इसी कंपनी की मशीनों का इस्तेमाल चुनाव आयोग भी करता है। यह मामला तब और गरमा गया जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग की सफाई पर ही सवाल उठा दिया था।
दिल्ली विश्वविद्यालय ने 10 साल पहले खरीदी थीं ईवीएम मशीनें
दरअसल ईसीआईएल भारत सरकार का उपक्रम है। यह परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन आता है। ईसीआईएल ही चुनाव आयोग के लिए ईवीएम मशीनों को तैयार करता है। इन मशीनों की देखरेख-रखरखाव, निगरानी सबकुछ ईसीआईएल के जिम्मे रहती है। हालांकि ईसीआईएल के अडिशनल जनरल मैनेजर राजीव माथुर इन मशीनों को काफी पुरानी बता रहे हैं। उनका कहना है कि दस साल पहले दिल्ली विश्वविद्यालय ने इन मशीनों को खरीदा था। वहीं पिंकी शर्मा का कहना है कि इन मशीनों की देखभाल आदि ईसीआईएल के ही कर्मचारी करते हैं। इन्हीं मशीनों के जरिए यहां छात्रसंघ के चुनाव होते रहे हैं।
कहां है बड़ा झोल
एक ईवीएम पर आठ उम्मीदवार के नाम थे। नौंवी बटन नोटा की थी। दसवां न तो कोई उम्मीदवार था और न ही वहां कोई वोट पड़ना था, लेकिन दसवें क्रमांक में 40 वोट पड़ गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी राजधानी कॉलेज में हुई इस तरह की गड़बड़ी को स्वीकार किया है। पिंकी शर्मा इसे तकनीकी खराबी और राजधानी कॉलेज की ओर से बरती गई लापरवाही मान रही हैं। उनका कहना है कि कालेज ने समय पर ध्यान दिलाया होता तो वहां मशीन बदल दी जाती। उन्होंने माना कि इस ईवीएम में गलती से नौ की बजाय दस बटन थे, ऐसा नहीं होना चाहिए था।