दिल्ली में इस समय कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां संक्रमण के सभी लक्षण होने के बावजूद भी कोरोना जांच में रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। इससे इन मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संक्रमण की पुष्टि न होने से कोविड अस्पताल इन मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा, इसकी वजह से सबसे अधिक परेशानी नॉन कोविड अस्पतालों में इलाज कर रहे डॉक्टरों को आ रही है।
पूर्वी दिल्ली का हेडगेवार अस्पताल नॉन कोविड है। इस अस्पताल में काफी ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिन्हें सभी लक्षण कोरोना के ही हैं। लेकिन रैपिड और आरटी पीसीआर टेस्ट में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। नॉन कोविड अस्पतालों के डॉक्टर इन मरीजों का इलाज करने में डर रहे हैं। वहीं, रेफर करने के बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव होने की वजह से कोविड विशेष अस्पताल भी ऐसे मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं।
स्वामी दयानंद अस्पताल भी नॉन कोविड अस्पताल है। लेकिन इस अस्पताल के इमरजेंसी में सिर्फ एक दर्जन से अधिक ऐसे मरीज पिछले एक सप्ताह में समाने आ चुकें हैं, जिनके सभी लक्षण कोविड के हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। ऐसे मरीजों को भर्ती कर इलाज करना अस्पताल के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इसमें से कई मरीज ऐसे भी सामने आए हैं, जिनकी अस्पताल में एडमिट होने के चार दिन बाद कोविड की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें इलाज के लिए कोविड विशेष अस्पताल में रेफर किया गया। इसी तरह लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल और जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में भी रोज चार से पांच मामले सामने आ रहे हैं।
इन अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मरीजों के लिए कोविड अस्पतालों में कोरोना संदिग्ध वार्ड बनाने की जरूरत है। कोविड और नॉन कोविड के चक्कर में मरीजों के साथ-साथ इलाज करने वाले स्टाफ का भी नुकसान हो रहा है।