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चिंता: तीसरी लहर की आशंका में कब्रिस्तान के लिए जमीन की तलाश शुरू, दिल्ली के सबसे बड़े कब्रिस्तान में बढ़ाई जगह

Wed, 30 Jun 2021 10:27 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आईटीओ स्थित राजधानी के सबसे बड़े कब्रिस्तान में जगह बढ़ाई जा रही है। जबकि मिलेनियम पार्क के पास एक वैकल्पिक भूमि की पहचान की गई है। 
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कब्रिस्तान में जनाजे दफनाते लोग। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कोरोना महामारी की अब तक सामने आईं लहरों ने जहां एक तरफ संक्रमण को फैला दिया। वहीं इसके चलते हजारों लोगों की मौतें भी हुईं। ऐसे में कब्रिस्तान और श्मशान घाटों पर भी हालात पिछली लहर में सबके सामने थे। हालात इस कदर हैं कि कब्रिस्तानों के लिए अब भूमि कम पड़ने लगी है। तीसरी लहर की आशंका को लेकर कहीं कब्रिस्तान के लिए जमीन की तलाश शुरू हो चुकी है तो कहीं पत्र लिखने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई है।  

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आईटीओ स्थित राजधानी के सबसे बड़े कब्रिस्तान में जगह बढ़ाई जा रही है। जबकि मिलेनियम पार्क के पास एक वैकल्पिक भूमि की पहचान की गई है। आईटीओ स्थित कब्रिस्तान की प्रबंधन समिति के सदस्य कयामुद्दीन ने बताया कि पिछले डेढ़ साल से वह गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं जो बार कम होने की जगह बढ़ती गई। पहली लहर के दौरान जितनी मौतें नहीं हुई उससे ज्यादा दूसरी लहर में देखने को मिलीं। करीब 10 एकड़ में फैले इस कब्रिस्तान में पांच एकड़ भूमि कोविड शवों के लिए आरक्षित की गई थी लेकिन अब वह पूरी तरह से भर चुकी है। इसलिए कब्रिस्तान की थोड़ी जगह और बढ़ाई है जहां करीब 200 से 300 शवों को दफनाया जा सकता है। इससे अधिक आईटीओ कब्रिस्तान के पास क्षमता नहीं है। 

अन्य सदस्य रशीद ने कहा कि पिछले दो महीने में यहां 1,500 से अधिक शवों को दफनाया गया है। अब तक यहां तीन हजार से अधिक शव हो चुके हैं। वहीं दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और ओखला विधायक अमानतुल्ला खान ने बताया कि मिलेनियम पार्क के पास एक वैकल्पिक भूमि की पहचान की गई है और जरूरत पड़ने पर दफनाने के लिए इसके उपयोग के आदेश जारी किया जाएगा।  
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दरअसल मिलेनियम पार्क के पास चार एकड़ जमीन दफनाने के लिए उपलब्ध थी, लेकिन कुछ स्थानीय लोग वहां दफनाने का विरोध करते थे। कयामुद्दीन के अनुसार यह जमीन साल 1964 में दफनाने के लिए दी गई थी लेकिन अभी तक यहां विवाद चल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर तीसरी लहर आती है तो उनके पास पर्याप्त भूमि नहीं होगी। ऐसे में एक बड़ा संकट खड़ा होने से पहले ही भूमि की तलाश जरूरी है। 
शास्त्री पार्क के एक सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल सत्तार ने बताया कि उनके यहां कब्रिस्तान ट्रांस-यमुना क्षेत्रों के लिए है। यह यमुना पार के क्षेत्रों में सबसे महत्वपूर्ण कब्रिस्तान है। इसके अलावा कुछ अन्य छोटे कब्रिस्तान भी हैं। दूसरी लहर के दौरान शवों के बढ़ने के कारण यहां अब जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री, दिल्ली सरकार, नगर निगम और दिल्ली विकास प्राधिकरण सहित विभिन्न अधिकारियों को पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। 

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