आईआईटी दिल्ली इंजीनियरिंग की पढ़ाई और रिसर्च के साथ-साथ अब स्वास्थ्य उपकरण बनाने में भी महारत हासिल करेगा। कोरोना काल से सबक लेते हुए आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आईआईटी दिल्ली आधुनिक और सस्ते मेडिकल डिवाइस प्रोडक्शन का हब बनाने के लिए नया कैंपस बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आईआईटी जगह तलाश कर रहा है। देश में पहली बार मेडिकल और इंजीनियरिंग की संयुक्त डिग्री प्रोग्राम शुरू की जाएगी। इसके तहत एम्स दिल्ली के साथ मिलकर एमडी-पीएचडी की डिग्री जल्द शुरू होगी।
अभी तक आईआईटी और एम्स साथ मिलकर रिसर्च पर ही काम कर रहे थे, लेकिन जल्द ही पढ़ाई के साथ मेडिकल डिवाइस बनाएंगे। यह बात आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने पदभार संभालने के एक महीना पूरा होने पर ‘अमर उजाला’ संवाददाता सीमा शर्मा से खास बातचीत में कही। उन्होंने अपने अगले पांच साल के विजन और नए अनुभव पर विस्तार से बात की। पेश है रिपोर्ट...
एनईपी के तहत किस प्रकार बहुविषयक प्रोग्राम शुरू करेंगे?
बहुविषयक कोर्स शुरू करने से पहले हमारी कोशिश है कि हम जेएनयू, डीयू, जामिया जैसे अन्य किसी भी संस्थान के छात्र को आईआईटी दिल्ली में भी साथ-साथ पढ़ने का मौका दें। उदाहरण के तौर पर जेएनयू और जामिया में इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती है, लेकिन पाठ्यक्रम और किसी विषय की फैकल्टी या कोर्स की सुविधा नहीं है, तो ऐसे छात्र आईआईटी में उस विषय की पढ़ाई कर सकते हैं। यह सुविधा सिर्फ छात्र को ज्ञान अर्चित करने के लिए मिलेगी। इसमें डिग्री उन्हें उसी विश्वविद्यालय की मिलेगी, जहां उन्होंने दाखिला लिया होगा।
छात्र-शिक्षकों के लिए किस प्रकार के बदलाव की योजना रहेगी?
आईआईटी में जेईई एडवांस के माध्यम से देशभर से विभिन्न आर्थिक-सामाजिक पृष्ठभूमि के छात्र आते हैं। इसलिए हमारी कोशिश है कि छात्रों को बेहतर माहौल देने के साथ उनके अंदर की झिझक को दूर कर उन्हें समानता से आगे बढ़ाया जाए। उनके अनुभव को बेहतर बनाते हुए उन्हें बेहतर सामाजिक इंसान बनाना है, ताकि जब वे इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर कैंपस से निकले तो समाज को देने के लिए उनके पास अलग सोच हो। हम अपनी फैकल्टी को भी इस प्रकार प्रशिक्षित करना चाहते हैं कि उनके और छात्रों के बीच की दूरियां कम हो सके। फैकल्टी सदस्य स्मार्ट छात्र के साथ-साथ एवरेज छात्रों पर भी बराबर ध्यान देंगे, ताकि वे खुद को पिछड़ा हुआ महसूस न करें। हमें किसी भी छात्र का उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर आकलन नहीं करना है। हर छात्र अपने आप में खास है।
पढ़ाई और पढ़ाने के तरीके में किस प्रकार बदलाव लाएंगे?
आज की पीढ़ी इंटरनेट और सोशल मीडिया की है। हमें एजुकेशन सिस्टम को भी इसके अनुसार रोचक बनाना जरूरी है। वैसे तो आईआईटी में बीटेक से लेकर एमटेक प्रोग्राम के पाठ्यक्रम में जरूरत के आधार पर अपग्रेडशन होता रहता है, लेकिन आज की पीढ़ी को विषयों से जोड़े रखने के लिए कोर्स में बदलाव जरूरी है। आईआईटी दिल्ली में पिछले आठ से 10 साल से पूरे पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं किया गया है। सौभाग्य है कि मेरे कार्यकाल में यह बदलाव करने का मौका मिल रहा है। इसके लिए हम छात्रों, पूर्व आईआईटीयन, इंडस्ट्री, शिक्षकों और हर संबंधित पक्ष से विचार-विमर्श कर पूरा पाठ्यक्रम बदलेंगे। इसमें एक से दो साल का समय लग सकता है।
छात्रों को समाज के प्रति कैसे कर्तव्यनिष्ठ बनाएंगे?
अभी तक छात्र क्लासरूम की पढ़ाई के बाद इंटर्नशिप के लिए कंपनियों में चले जाते हैं। हमारा प्रयास होगा कि छात्रों को गांवों में इंटर्नशिप कराई जाए, जिससे वे समाज में आम लोगों की परेशानियों का समझ सकें और प्रैक्टिकल अनुभव के आधार पर मानसिक रूप से तैयार हों। हमारा मकसद है कि आईआईटी से छात्र सिर्फ नॉलेज आधारित डिग्री लेकर न जाए, बल्कि वह समाज में एक बेहतर इंसान बनकर जाएं।