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डाक्टरों के अभाव में इहबास को बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए: हाईकोर्ट

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) में डॉक्टरों की कमी पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि इहबास एक उत्तम संस्थान है और डॉक्टरों व स्टाफ की कमी के कारण इसे बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए एक वर्ष पूर्व आदेश दिया गया था लेकिन इसके बावजूद भर्ती नहीं की गई। अदालत ने दिल्ली सरकार को दो माह में डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी द्वारा सरकार के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याची ने इहबास के निदेशक के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करते हुए कहा कि यह देश का एक प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कुल 103 डॉक्टरों के स्वीकृत पद हैं लेकिन वर्तमान में मात्र 24 डॉक्टर ही कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में देशभर से मरीज इलाज के लिए आते हैं लेकिन डॉक्टरों के अभाव में उन्हें उचित इलाज नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर 2 सितंबर 2020 को अदालत ने सरकार व इहबास के निदेशक को डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की भर्ती करने का निर्देश दिया था। एक वर्ष बीतने के बावजूद डॉक्टरों व स्टाफ की भर्ती नहीं की गई।
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उन्होंने कहा कि मामले में जानबूझ कर अदालत के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में केंद्र, दिल्ली सरकार व इहबास के निदेशक के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए कहा कि मनोरोग से पीड़ित दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर (एसआई) को 11 फरवरी 2020 को इहबास ले जाया गया लेकिन उन्हें भर्ती नहीं किया गया और उक्त युवा पुलिस अधिकारी ने एंबुलेंस में आत्महत्या कर ली।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार को मामले से हटाया जा रहा है। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 मई तय की है।
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