नई दिल्ली। दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित करने और उसकी मौत के मामले में साकेत कोर्ट ने पति को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आरोप साबित करने के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल ने अनिल कुमार को दहेज प्रताड़ना और दहेज हत्या के आरोपों से बरी किया। अदालत ने कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि अनिल ने पत्नी अंजलि को दहेज के लिए उसकी मौत से कुछ समय पहले प्रताड़ित किया था। अंजलि के परिवार के कुछ लोगों ने दहेज को लेकर सामान्य आरोप लगाए थे, लेकिन किसी खास घटना, तारीख, समय या दहेज की मांग के बारे में साफ जानकारी नहीं दी।
अंजलि की शादी अनिल कुमार से 28 अप्रैल 2018 को हुई थी। 26-27 जून 2021 की रात पुल प्रहलादपुर स्थित किराये के मकान में उसकी मौत हो गई थी। शादी के सात साल के अंदर मौत होने के कारण मामला दहेज हत्या के आरोप में दर्ज किया गया था। कोर्ट ने कहा कि दहेज हत्या साबित करने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि महिला को दहेज के लिए मौत से कुछ समय पहले प्रताड़ित किया गया था। इस मामले में ऐसी कोई घटना साबित नहीं हुई। संवाद