मामले की अगली सुनवाई पांच अक्तूबर को
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि समलैंगिक साथियों को मेडिकल प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने वाली याचिका पर उसका जवाबी हलफनामा मीडिया तक कैसे पहुंचा।
अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से पूछा कि मीडिया को हलफनामे की प्रति कैसे मिली। चेतन शर्मा ने जवाब दिया कि सरकार ने हलफनामा मीडिया को नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इस मामले में पेश होंगे। केंद्र हलफनामे पर विचार कर रहा है और उसने दो-तीन हफ्ते का समय मांगा। याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ किरपाल ने स्थगन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मामला एक साल से लंबित है और देश के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने केंद्र को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई पांच अक्तूबर को होगी।
क्या है पूरा मामला
यह याचिका एक महिला ने दायर की है। उसने 2023 में न्यूजीलैंड में अपनी साथी से शादी की थी। याचिका में मेडिकल इमरजेंसी में समलैंगिक साथी को सहमति देने के लिए मान्यता देने की मांग की गई है। मौजूदा नियमों में केवल पति-पत्नी, माता-पिता या अभिभावक का जिक्र है।